विजयराघवगढ़ (कटनी) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित हो रहे हिंदू सम्मेलनों की श्रृंखला के अंतर्गत 08 फरवरी, रविवार को विजयराघवगढ़ स्थित द्वारका कॉलेज परिसर में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में राष्ट्रवादी विचारधारा से ओतप्रोत नागरिकों, मातृशक्ति, संतों एवं स्वयंसेवकों ने सहभागिता की।कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चरण वंदन के साथ हुई। इसके पश्चात मंचीय कार्यक्रम में उपस्थित संतों एवं विशिष्ट अतिथियों का माल्यार्पण एवं श्रीफल भेंट कर स्वागत किया गया।
सम्मेलन के दौरान महिला वक्ता के रूप में उपस्थित मातृशक्ति ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में मां के प्रेम, संस्कार और शिक्षा की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि
आज की माताएं बच्चों के मनोरंजन के लिए मोबाइल थमा देती हैं, जिसके दूरगामी और गंभीर दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा की शुरुआत मां के गर्भ से ही हो जाती है, इसलिए माताओं की भूमिका सबसे अहम है।
वहीं संत वक्ता के रूप में उपस्थित संत शिरोमणि जी महाराज ने हिंदू समाज को एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने शासन द्वारा समाज को विभाजित करने वाले नियमों का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इस प्रकार के नियम समाज को जोड़ने के बजाय बांटने का कार्य करेंगे, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
संघ वक्ता के रूप में जिला कार्यवाह संजय जी ‘भाई साहब’ उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि
“संघ का उद्देश्य भीड़ दिखाना नहीं, बल्कि समाज को उसकी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना है।”
उन्होंने कुटुंब प्रबोधन विषय पर विस्तार से बोलते हुए परिवार और समाज को एक सूत्र में पिरोने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में अनुशासन, संगठन और राष्ट्रप्रेम का भाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला। सम्मेलन ने हिंदू समाज में संस्कार, एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का संदेश दिया।
कैमोर से श्याम गुप्ता की रिपोर्ट ।