रिपोर्टर:जाकिर झंकार
डांग जिला के आहवा में आयोजित होने वाला “डांग दरबार” एक ऐतिहासिक और पारंपरिक महोत्सव है। इसकी शुरुआत वर्ष 1842 में ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी, जब डांग के भील राजाओं और नायकों को वार्षिक भत्ते और सम्मान प्रदान करने के लिए दरबार भराया जाता था।
स्वतंत्रता के बाद भी यह परंपरा जारी रही। वर्ष 1954 से राजाओं और नायकों को राजनीतिक पेंशन दी जाने लगी। होली से एक सप्ताह पूर्व आहवा में मेला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जाता है।
कोरोना काल (2020–2021) में कार्यक्रम सीमित रूप में आयोजित हुए, फिर भी आज “डांग दरबार” पूरे उत्साह, परंपरा और गरिमा के साथ मनाया जाता है।