सहारनपुर। जनपद में विकास कार्यों और अवैध निर्माण पर लगाम कसने के उद्देश्य से बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। शासन ने सूरज पटेल को सहारनपुर विकास प्राधिकरण (SDA) का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। उनके पदभार संभालने के साथ ही प्राधिकरण की कार्यशैली में सख्ती और तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
वहीं, इस बदलाव के पीछे पूर्व उपाध्यक्ष की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, उनके ‘दोहरे रवैये’ ने कई मामलों में विवाद खड़ा किया, जो अंततः उनके तबादले की वजह बना।
बताया जाता है कि एक मामले में प्राधिकरण के दो कर्मचारियों पर आरोप लगाए गए, लेकिन आरोप साबित नहीं हो सके। इसके बावजूद दोनों को निलंबित कर दिया गया, जिससे विभाग में असंतोष का माहौल बन गया।
इसी तरह, पत्रकारों से जुड़े एक मामले में पहले उनके खिलाफ प्रार्थना पत्र दिलवाया गया, लेकिन जब मामला उच्च स्तर तक पहुंचा तो उसी प्रकरण में उन्हें क्लीन चिट दे दी गई। इस घटनाक्रम ने भी प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए।
प्राधिकरण में मीटिंग हॉल निर्माण और ध्वस्तीकरण को लेकर तत्कालीन उपाध्यक्ष महोदय पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पहले से मौजूद लाखों रुपये की लागत से बना मीटिंग हॉल पूरी तरह ठीक स्थिति में था, इसके बावजूद उसे ध्वस्त कर दोबारा निर्माण कराया गया। हैरानी की बात यह है कि नए निर्माण पर भी 20 से 25 लाख रुपये खर्च होने के बाद उसे भी उपयोग में नहीं लाया जा सका और दोबारा बदलाव की कोशिश की गई। वर्तमान स्थिति यह है कि प्राधिकरण में कोई भी व्यवस्थित मीटिंग हॉल संचालित नहीं है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग और बंदरबांट की आशंका गहराती जा रही है। यह पूरा मामला उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार इस पूरे प्रकरण में एक संविदा लेखाकार की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सूत्रों का दावा है कि 11 महीने के अनुबंध के जरिए नियुक्त इस लेखाकार को विशेष लाभ पहुंचाया गया और उसी के कार्यकाल में मीटिंग हॉल से जुड़े विवादित फैसले लिए गए। आरोप यह भी है कि वित्तीय प्रक्रियाओं में अनियमितताओं को नजरअंदाज किया गया, जिससे सरकारी धन के बंदरबाट पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि वित्तीय अनियमितता का भी बन सकता है।
इसके अलावा, जनता रोड स्थित एक कथित अवैध होटल का नक्शा पास किए जाने का मामला भी सामने आया है, जिससे प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर और सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों की मानें तो इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन उपाध्यक्ष की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि निर्णय लेने में पारदर्शिता की कमी और निजी हितों को प्राथमिकता देने के कारण प्राधिकरण को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। एक के बाद एक लिए गए फैसलों ने न सिर्फ विभागीय संसाधनों को प्रभावित किया, बल्कि प्रशासनिक साख पर भी असर डाला। अब यह देखना अहम होगा कि इन फैसलों की निष्पक्ष जांच होती है या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाता है।
अब सभी की निगाहें नए उपाध्यक्ष सूरज पटेल पर टिकी हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती प्राधिकरण की साख को बहाल करना और अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना होगी। और विभागीय अनियमितताएं भी एक अहम मुद्दा होगी?
रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़