उरई(जालौन):
जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना की समीक्षा बैठक कर सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान पाया गया कि जनपद को आवंटित 1700 लक्ष्य के सापेक्ष 3744 आवेदन बैंकों को प्रेषित किए गए, जिनमें से मात्र 1551 आवेदन स्वीकृत हुए तथा केवल 1362 प्रकरणों में ही ऋण वितरण किया गया। इस गंभीर स्थिति पर जिलाधिकारी ने बैंकर्स को कड़ी फटकार लगाई। बैठक में प्रस्तुत बैंकवार डाटा के अनुसार बन्धन बैंक, ग्रामीण बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक सहित कई बैंक ऐसे पाए गए, जहां या तो स्वीकृति अत्यंत कम रही अथवा स्वीकृत प्रकरणों के बावजूद डिस्बर्समेंट में रूचि नहीं ली जा रही है।जिलाधिकारी ने कड़े शब्दों में कहा कि स्वीकृत प्रकरणों को लंबित रखना सीधे-सीधे शासन की योजनाओं को बाधित करना है, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी बैंकर्स लंबित स्वीकृत प्रकरणों का तत्काल एवं अनिवार्य रूप से डिस्बर्समेंट सुनिश्चित करें। जिन बैंकों की प्रगति अत्यंत खराब है, उनके विरुद्ध जवाबदेही तय कर कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी, यदि अगली समीक्षा तक स्थिति में सुधार नहीं पाया गया तो संबंधित शाखा प्रबंधकों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई एवं प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी डिस्बर्समेंट गैप को शून्य करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, अन्यथा संबंधित बैंक जिम्मेदार माने जाएंगे।जिलाधिकारी ने कहा कि यह योजना युवाओं को रोजगार एवं आत्मनिर्भरता से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही, शिथिलता या उदासीनता को कदापि बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी बैंकर्स को चेतावनी दी गई कि वे तत्काल अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।जिलाधिकारी उपायुक्त उधोग व एलडीएल का शिथिल पर्यवेक्षण पर कार्यवाही के निर्देश दिए। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह, उपायुक्त उधोग धर्मेंद्र कुमार भास्कर, एलडीएम अनुराग सक्सेना आदि सहित संबंधित विभागीय अधिकारी एवं विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
(अनिल कुमार ओझा ब्यूरो प्रमुख उरई-जालौन) उत्तर प्रदेश