राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
कटनी।
गुजरा हुआ समय आज भी लोगों की यादों में जिंदा है। वह दौर ऐसा था जब ना बिजली की चमक थी, ना इंजन वाली गाड़ियों का शोर, ना चौड़ी सड़कों का जाल और ना ही आधुनिक सुविधाओं की भरमार। बावजूद इसके जीवन में सुकून था, वातावरण में शुद्धता थी और लोगों के दिलों में अपनापन बसता था।
उस समय की कटनी नदी इतनी स्वच्छ और निर्मल हुआ करती थी कि लोग सीधे घाट पर जाकर उसका पानी पी लिया करते थे। नदी के घाट साफ-सुथरे रहते थे और आसपास का वातावरण प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर होता था। बाजारों में गंदगी नहीं बल्कि स्वच्छता दिखाई देती थी। हवा में धुएं का जहर नहीं था और नालियों से उठती बदबू भी लोगों की जिंदगी का हिस्सा नहीं बनी थी।
चारों ओर फलदार वृक्षों की हरियाली वातावरण को शीतल बनाती थी। गांव और शहर में लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनते थे। सहयोग और भाईचारे की भावना समाज की सबसे बड़ी ताकत हुआ करती थी।
आधुनिकता और विकास की दौड़ में जहां सुविधाएं बढ़ी हैं, वहीं प्रकृति और सामाजिक आत्मीयता कहीं पीछे छूटती नजर आ रही है। पुराने समय की यही यादें लोगों को यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि असली समृद्धि केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि स्वच्छ वातावरण, प्राकृतिक संतुलन और मानवीय संबंधों से होती है।