ई-रजिस्ट्रेशन के खिलाफ बरेली में बवाल, दस्तावेज लेखकों ने ठप किया कामकाज
बरेली में निबधन भवन पर धरना, ई-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था के विरोध में दस्तावेज लेखकों की हड़ताल — रोजगार छिनने की आशंका जताई, सरकार से ई-रजिस्ट्रेशन योजना निरस्त करने की मांग
बरेली तहसील रिपोर्ट- शुभम चौबे
बरेली। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित ई-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था के विरोध में शनिवार को बरेली सहित प्रदेशभर में दस्तावेज लेखकों ने सांकेतिक हड़ताल कर अपना विरोध दर्ज कराया। बरेली के निबंधन भवन परिसर में दस्तावेज लेखक कल्याणकारी समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में दस्तावेज लेखक, स्टाम्प वेंडर, टाइपिस्ट और अन्य संबंधित लोग एकत्र हुए तथा सरकार से प्रस्तावित व्यवस्था को वापस लेने की मांग की।
उप निबंधक खंड द्वितीय राजेंद्र प्रसाद पांडे ने बताया कि शासन स्तर पर ई-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है। फिलहाल इसे लखनऊ और वाराणसी में प्राधिकरण क्षेत्र की रजिस्ट्रियों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने की योजना है। सामान्य रजिस्ट्रियों में अभी इसे लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर भविष्य में प्रदेश के अन्य औद्योगिक और बड़े शहरों में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।
दस्तावेज लेखक कल्याणकारी समिति, सदर बरेली द्वारा सहायक महानिरीक्षक निबंधन को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि दस्तावेज लेखक कई पीढ़ियों से दस्तावेज लेखन और पंजीकरण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं। उनका कहना है कि दस्तावेज लेखन एक तकनीकी और कानूनी प्रक्रिया है, जिसके लिए अनुभव और नियमों की गहन जानकारी आवश्यक होती है।
समिति ने आशंका जताई कि यदि दस्तावेज तैयार करने का कार्य किसी नई संस्था या ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से कराया गया तो दस्तावेजों में त्रुटियों की संभावना बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा और विवाद बढ़ने से न्यायालयों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि ई-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू होने से केवल दस्तावेज लेखक ही नहीं, बल्कि स्टाम्प विक्रेता, टाइपिस्ट, फोटोग्राफर, अधिवक्ता, सहायक कर्मचारी तथा इस व्यवस्था से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इससे उनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न होने की आशंका है।
बरेली में आयोजित एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल में समिति के अध्यक्ष अमर सिंह, सचिव राकेश सक्सेना, उपाध्यक्ष तेजपाल सिंह पटेल, कोषाध्यक्ष नरेन्द्र बाबू, सहसचिव राजेश कुमार सक्सेना, ऑडिटर रजनीश शर्मा,महेंद्र सक्सेना,जेपीएस पाल,मनोज विकट, संजू सक्सेना, सतीश चंद्र कार्तिक, सुधीर सक्सेना, राजेश सक्सेना, तेजपाल मौर्य, राजू चंद्रवंशी, संजीव शर्मा, रजनीश शर्मा, कमल सहित बड़ी संख्या में दस्तावेज लेखक और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
विरोध प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यदि शासन ने उनकी समस्याओं और भावनाओं को गंभीरता से नहीं लिया तथा दस्तावेज लेखकों की भूमिका को स्पष्ट करते हुए उचित शासनादेश जारी नहीं किया, तो भविष्य में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि वर्तमान व्यवस्था को यथावत रखते हुए ई-रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
फिलहाल ई-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था को लेकर सरकार और दस्तावेज लेखक संगठनों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और व्यापक चर्चा तथा निर्णय की संभावना जताई जा रही है।