बारीपदा, 2/9: ‘आदिवासी कोई जाति नहीं’ और ‘सरना कोई धर्म नहीं’ संबंधी टिप्पणी के विरोध में आदिवासी सेंगेल अभियान ने प्रदर्शन किया। इस संबंध में अभियान के ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष नारान मुर्मू के नेतृत्व में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम मयूरभंज जिलाधिकारी के माध्यम से एक मांगपत्र सौंपा गया।मांगपत्र में सेंगेल अभियान की ओर से कहा गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 में ‘अनुसूचित जनजाति’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है। अभियान के अनुसार, आदिवासी समाज की एक स्वतंत्र धार्मिक पहचान है और सरना धर्मावलंबी प्रकृति की पूजा करते हैं।मांगपत्र में दावा किया गया है कि 2011 की जनगणना में करीब 50 लाख लोगों ने अपने धर्म के रूप में ‘सरना धर्म’ का उल्लेख किया था। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और झारखंड विधानसभा में सरना धर्म को स्वतंत्र धर्म के रूप में मान्यता देने संबंधी प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजे जाने की बात भी मांगपत्र में कही गई है।अभियान की ओर से आगे आरोप लगाया गया है कि गत 19 अगस्त को बारीपदा सर्किट हाउस में वनवासी कल्याण आश्रम और जनजाति सुरक्षा मंच के कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित पत्रकार सम्मेलन में ‘सरना धर्म कोई धर्म नहीं’ और आदिवासी हिंदू हैं, जैसी टिप्पणियां की गई थीं। अभियान का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियों से आदिवासी समाज और सरना धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।इसके साथ ही ‘आदिवासी कोई जाति नहीं’ और आदिवासियों को ‘वनवासी’ कहे जाने संबंधी टिप्पणी का भी सेंगेल अभियान ने विरोध किया है। संबंधित वक्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के साथ उन्हें एसटी सूची से डीलिस्ट करने की मांग भी की गई है।मांगों में संविधान के अनुच्छेद 342 में ‘अनुसूचित जनजाति’ का नाम बदलकर ‘आदिवासी’ करने, तत्काल सरना धर्म कोड को मान्यता देने और धर्मांतरित आदिवासियों को एसटी सूची से डीलिस्ट करने की मांग शामिल है।मांगपत्र सौंपने के दौरान ओडिशा प्रदेश पारगाना कालूराम मुर्मू, बारीपदा जोनल पारगाना माधव चंद्र मुर्मू, जिला अध्यक्ष उदयनाथ हेम्ब्रम के अलावा बहादुर मुर्मू, विकास हेम्ब्रम, नारान मुर्मू, चैतन्य हेम्ब्रम और रूपश्री मुर्मू समेत 14 प्रमुख नेता उपस्थित थे। मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज, ओडिशा राज्य संपादक।