शिक्षक राजनीति में सक्रिय डॉ शरदेंदु कुमार त्रिपाठी (प्राचीन इतिहास विभाग, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु ) वे पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने गौतम बुद्ध के पिपरहवा अवशेषों की हाँगकांग में हो रही नीलामी को रुकवाने और उन अवशेषों को वापस लाने के लिए आवाज़ उठाई थी उनकी इस पहल के कारण ही न सिर्फ़ नीलामी रुकी बल्कि भारत की धरोहर गौतम बुद्ध के पिपरहवा अवशेष देश में वापस आ पाए।
देश विदेश में पहचान बनाने वाले डॉ शरदेंदु अत्यंत उत्साही सक्रिय और चिंतनशील व्यक्तित्व के इंसान हैं।
आज उन्होंने विधान परिषद चुनावों के लिए जिले में प्रबंधकों शिक्षकों से मांगा समर्थन और जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सघन चुनावी दौरा किया ।इस अभियान में क्षेत्र के दर्जनों विद्यालयों का भ्रमण कर शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और विद्यालय प्रबंधकों से सीधा संवाद स्थापित किया।
इस बात की जानकारी देते हुए डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि इस जनसंपर्क अभियान का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर शिक्षा जगत से जुड़े लोगों की समस्याओं को समझना और उनके स्थायी समाधान के लिए रणनीति तैयार करना था।
उन्होंने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा, “भ्रमण के दौरान शिक्षकों और प्रबंधकों ने शिक्षा व्यवस्था में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों, मानदेय, पुरानी पेंशन और अन्य विभागीय विसंगतियों मेरे समक्ष प्रमुखता से रखा। मैंने सभी की समस्याओं को बेहद गंभीरता से सुना और शिक्षक सदन में मजबूती से आवाज उठाने का भरोसा दिया।”
उन्होंने आगे बताया कि इस जनसंपर्क के दौरान क्षेत्र के प्रबुद्ध वर्ग में मेरे मिशन को लेकर भारी उत्साह देखा गया। सभी ने एक स्वर में मेरे ‘मिशन’ के साथ जुड़ने का संकल्प लिया और आगामी एमएलसी चुनाव में ऐतिहासिक मतों से विजयी बनाने के लिए अभूतपूर्व सहयोग और पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की।
इस अवसर पर क्षेत्र के कई वरिष्ठ शिक्षक, शिक्षाविद और स्थानीय गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे, जिन्होंने डॉ. त्रिपाठी के नेतृत्व पर अपना गहरा विश्वास व्यक्त कियाI इस जनसम्पर्क में आजमगढ़ प्रतिनिधि श्री देवी प्रसाद पाण्डेय, प्रतिनिधि श्री विपिन कुमार, सिद्धार्थ नगर के प्रतिनिधि श्री धीरेंद्र वर्मा एवं स्थानीय प्रतिनिधि श्री आशीष तिवारी उपस्थित रहे। इस अभियान के अंतर्गत इंडियन पुब्लिक इण्टर कॉलेज, जनता इण्टर कॉलेज, राष्ट्रवादी इण्टर कॉलेज समेत अनेक विद्यालयों का भ्रमण किया गया I