लोकेशन टीकमगढ़
रिपोर्टर महेंद्र कुमार दुबे बॉबी
टीकमगढ़
टीकमगढ़। गांवों की गलियों में बहने वाले गंदे पानी, कीचड़ और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए टीकमगढ़ जिले में अपनाया गया ग्रे वॉटर प्रबंधन मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। आईएससी-फिक्की स्वच्छता पुरस्कार में टीकमगढ़ को ग्रे वॉटर प्रबंधन श्रेणी में राष्ट्रीय विजेता चुना गया है।
नई दिल्ली में आयोजित समारोह में कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय, तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ नवीत कुमार धुर्वे एवं जिला समन्वयक मनीष जैन ने पुरस्कार ग्रहण किया।
इस मॉडल की शुरुआत टीकमगढ़ के चंद्रपुरा गांव से हुई थी। महज दो वर्षों में यह प्रयोग जिले की करीब 225 ग्राम पंचायतों तक पहुंच गया। घरों से निकलने वाले स्नान, कपड़े धोने और रसोई के पानी को खुले में बहने से रोकने के लिए घरों के बाहर सिल्ट चैम्बर बनाए गए। इन चैम्बरों को पाइपलाइन से जोड़कर गंदे पानी को भूमिगत पाइपों के माध्यम से गांव के अंतिम छोर तक पहुंचाया जाता है, जहां सोख्ता गड्ढों के जरिए पानी का निस्तारण किया जाता है।
भूमिगत जल निकासी व्यवस्था से गांव की गलियों में गंदे पानी और कीचड़ की समस्या में कमी आई है। जलभराव से राहत मिलने के साथ ग्रामीणों के आवागमन में भी सुविधा हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले जहां गलियों में गंदा पानी और कीचड़ रहता था, अब वही रास्ते साफ-सुथरे नजर आने लगे हैं।
जिला प्रशासन के अनुसार इस पूरी पहल में ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी, तकनीकी मार्गदर्शन और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का उपयोग किया गया। कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने राष्ट्रीय पुरस्कार को ग्राम पंचायतों के संकल्प और सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया।
एक गांव से शुरू हुआ प्रयोग अब 225 गांवों तक पहुंच चुका है। टीकमगढ़ का यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय समस्या का स्थानीय स्तर पर समाधान तलाशने की मिसाल बनकर सामने आया है।