बारीपदा, 26/09: आज के समय में समाज में बढ़ती स्वार्थपरता और नैतिक मूल्यों के पतन के कारण सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। यदि ईश्वर की इच्छा से झूठ बोलने पर बुखार हो जाता, चोरी करने पर हाथ कांपने लगता और किसी से ईर्ष्या करने पर व्यक्ति मूक हो जाता, तो बिगड़ते समाज को सुधारा जा सकता था। उक्त विचार स्थानीय रोटरी भवन में आयोजित सद्भावना समिति के 522वें मासिक सद्भावना दिवस कार्यक्रम में वक्ताओं ने व्यक्त किए।कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के कोषाध्यक्ष संदीप कुमार चांद ने की। कार्यक्रम के प्रारंभ में इस माह जन्मे स्वामी शिवानंद, ठाकुर अनुकूलचंद्र एवं स्वामी चिदानंद की स्मृति में श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आज समाज में आपसी जुड़ाव के सेतु बनाने के बजाय विभाजन की दीवारें खड़ी की जा रही हैं। समिति के संस्थापक धर्मरत्न पूर्णचंद्र बुगुडई ने कहा कि वर्तमान समय में लोग माया और भ्रम में पड़कर अर्थ को सर्वस्व मानने लगे हैं तथा अपने दोषों को छिपाने के लिए विभिन्न संगठनों के माध्यम से पत्र-पत्रिकाओं में अपना प्रचार करवाना पसंद कर रहे हैं।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बारीपदा स्नातक महाविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. प्रबोध दे, चक बंदोबस्त अधिकारी राखाल चंद्र परिडा, डॉ. विजय कुमार अग्रवाल, प्राध्यापक राजेंद्र कुमार सामल, डॉ. झरनारानी बेहरा, पद्मनाभ साहू, नरसिंह बारिक, कैवल्य प्रसाद महापात्र, भाग्यधर नंद एवं अशोक कुमार पलाई सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।वक्ताओं ने “मुफ्त के पैसे से ठेकेदारी करना समाजसेवा नहीं है” विषय पर अपने विचार रखते हुए समाजसेवा के वास्तविक उद्देश्य, सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों पर प्रकाश डाला।समिति के सचिव मानस रंजन महापात्र ने स्वागत भाषण दिया, जबकि सदस्य दामोदर पति ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस दौरान आगामी 9 अक्टूबर को आयोजित होने वाले गोपबंधु जयंती कार्यक्रम के लिए सभी को आमंत्रित किया गया।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज।