बारीपदा, 6 अक्टूबर:जिस विद्यालय से कभी एक सामान्य छात्र के रूप में अपने शिक्षा जीवन की शुरुआत की थी, करीब 13 साल बाद उसी विद्यालय में लौटकर ‘ओडिशा रत्न राष्ट्रीय सम्मान-2026’ से सम्मानित कविश्री राजेंद्र दास भावुक हो उठे। लक्ष्मीनारायण न्यू गवर्नमेंट हाई स्कूल, बरकंद की ओर से उनकी उपलब्धि और सम्मान के उपलक्ष्य में एक विशेष अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया।इस अवसर पर विद्यालय परिवार की ओर से कविश्री राजेंद्र दास को पुष्पगुच्छ और उत्तरीय प्रदान कर सम्मानित किया गया। छात्र-छात्राओं के सामने उन्हें एक सफल पूर्व छात्र और प्रेरणा के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।समारोह के दौरान कविश्री राजेंद्र दास ने अपने 13 वर्ष पुराने छात्र जीवन की यादों को साझा किया। उन्होंने उस दौर के संघर्ष, अभाव, कठिनाइयों और सफलता हासिल करने के लिए किए गए निरंतर परिश्रम के अनुभव छात्र-छात्राओं के साथ साझा किए।उन्होंने कहा कि सफलता के लिए केवल सपने देखना पर्याप्त नहीं है। सपनों को साकार करने के लिए धैर्य, अनुशासन और निरंतर मेहनत जरूरी है। जिस विद्यालय में कभी वे स्वयं छात्र बनकर पढ़ाई किया करते थे, आज उसी विद्यालय में उन्हें विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का उदाहरण माना जा रहा है। उन्होंने इसे अपने जीवन का बेहद भावुक और गौरवपूर्ण क्षण बताया।कविश्री राजेंद्र दास ने अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों, परिवार और शुभचिंतकों को देते हुए विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।इस सम्मान समारोह में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका पद्मावती हांसदा सहित शिक्षक-शिक्षिकाओं में सुशांत कुमार महांत, सावित्री दे, इतिश्री सिंह, प्रमिला राउत, राजश्री बेहरा और विजय कुमार हांसदा उपस्थित रहे। कविश्री राजेंद्र दास के बड़े भाई लक्ष्मीधर दास और पदन कुमार दास भी समारोह में उपस्थित रहकर इस भावुक क्षण के साक्षी बने।पुराने विद्यालय, गुरुजनों, परिवार और छात्र-छात्राओं के बीच हुए इस मिलन ने पूरे वातावरण को भावनात्मक बना दिया। एक पूर्व छात्र के रूप में कविश्री राजेंद्र दास की सफलता ने विद्यालय के वर्तमान विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की नई प्रेरणा दी।कभी इसी विद्यालय की कक्षा में बैठकर पढ़ाई करने वाला एक छात्र आज उसी विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। संघर्ष से सफलता और सफलता से सम्मान तक का यह सफर विद्यालय परिवार के लिए निश्चित रूप से एक अविस्मरणीय क्षण बन गया।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज, स्टेट हेड।