बारीपदा, 15 अक्टूबर: ओडिशा के मयूरभंज जिले में छात्र संसद चुनाव से पहले 77 छात्र-छात्राओं को पुलिस द्वारा रोके जाने की घटना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मोरड़ा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चित्रड़ा महाविद्यालय के तृतीय वर्ष विज्ञान संकाय के 77 छात्र-छात्राएं दो बसों में सवार होकर पुरी जा रहे थे। इसी दौरान मोरड़ा थाना पुलिस ने बेतनटी थाना क्षेत्र के दांतियामुहाँ चौक पर दोनों बसों को रोक लिया और छात्र-छात्राओं से पूछताछ की।
इसके बाद पुलिस सभी छात्र-छात्राओं को बेतनटी थाने ले गई। बाद में कॉलेज के प्राचार्य को बुलाकर बातचीत की गई। इसके पश्चात सभी को कॉलेज ले जाया गया, जहां उनके अभिभावक पहुंचकर उन्हें अपने साथ घर ले गए।
पुलिस का आरोप—चुनाव में वोट हासिल करने के लिए ले जाया जा रहा था पुरी
मोरड़ा थाना प्रभारी सुमित कुमार सोरेन के अनुसार, मंगलवार रात करीब 9 बजे पुलिस को विशेष सूत्रों से सूचना मिली थी कि एक विशेष गुट छात्र संसद चुनाव में अपने प्रत्याशी के पक्ष में वोट हासिल करने के उद्देश्य से छात्र-छात्राओं को दो बसों में पुरी घुमाने ले जा रहा है।
सूचना मिलने के बाद पुलिस ने दोनों बसों को रोककर पूछताछ की। इन 77 छात्र-छात्राओं में 52 छात्राएं और 25 छात्र शामिल थे। बसों में कुछ अभिभावक भी मौजूद थे।
थाना प्रभारी ने बताया कि जांच के दौरान एक विशेष गुट की ओर से छात्र-छात्राओं को पुरी ले जाने की बात सामने आई। पुलिस ने उन्हें ऐसा नहीं करने की समझाइश दी और कॉलेज के प्राचार्य को भी बुलाया। इसके बाद सभी छात्र-छात्राओं को कॉलेज पहुंचाया गया, जहां से उनके अभिभावक उन्हें घर ले गए।
थाना प्रभारी का कहना है कि छात्र संसद चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू है। ऐसी स्थिति में किसी भी गुट द्वारा छात्रों पर दबाव डालना या उन्हें चुनावी लाभ के उद्देश्य से घुमाने ले जाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इतनी बड़ी संख्या में एक ही कॉलेज के छात्र-छात्राओं के पुरी जाने की जानकारी कॉलेज प्रशासन को नहीं दी गई थी। छात्रों को प्राचार्य को सूचित करना चाहिए था और प्राचार्य को पुलिस को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी।
छात्र-छात्राओं ने पुलिस के आरोपों को किया खारिज
दूसरी ओर, छात्र-छात्राओं ने पुलिस के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। पुरी जा रही एक छात्रा ने बताया कि उन्हें कोई राजनीतिक गुट अपने खर्च पर पुरी नहीं ले जा रहा था। सभी छात्र-छात्राएं अपने पैसे से पुरी जा रहे थे।
उसने कहा कि छात्र संसद चुनाव में उनके एक सहपाठी प्रत्याशी के रूप में खड़े हुए हैं। उनकी जीत की कामना करते हुए सभी छात्र-छात्राएं पुरी जा रहे थे। इस यात्रा के लिए उन्होंने अपने अभिभावकों से अनुमति भी ली थी और कुछ अभिभावक उनके साथ बस में यात्रा कर रहे थे।
छात्रा ने स्पष्ट किया कि यह कॉलेज की ओर से आयोजित कोई शैक्षणिक भ्रमण नहीं था, बल्कि वे अपने निजी प्रयास से पुरी जा रहे थे। ऐसे में पुलिस द्वारा उन्हें रास्ते में रोककर वापस भेजना उनके साथ अन्याय है।
दो घंटे तक रोकने और मतदान नहीं करने का लिखित आश्वासन मांगने का आरोप
छात्रा ने पुलिस पर दुर्व्यवहार करने का भी आरोप लगाया। उसके अनुसार, छात्र-छात्राओं को लगभग दो घंटे तक रोके रखा गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि थाना प्रभारी ने पुरी जाने की अनुमति देने के लिए उनसे लिखित रूप में यह देने को कहा कि वे छात्र संसद चुनाव में मतदान नहीं करेंगे।इस घटना के बाद छात्र-छात्राओं को रोकने की पुलिस की कार्रवाई और उसके पीछे बताए गए कारणों को लेकर विवाद गहरा गया है। एक ओर पुलिस चुनाव आचार संहिता और संभावित चुनावी प्रभाव का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी ओर छात्र-छात्राएं अपनी यात्रा को निजी बताते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।
मयूरभंज से ओडिशा संवाददाता हिमांशु शेखर प्रह
