– सीडीओ रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड की अभिनव पहल, जिले के आंगनबाड़ी केंद्र बन रहे बच्चों की पहली पाठशाला
– लेवा और कोट (बेहटा) समेत कई केंद्रों पर स्मार्ट टीवी, बाल-सुलभ शौचालय और ‘BALA’ कॉन्सेप्ट से हो रही प्री-स्कूल शिक्षा
– हर दीवार बनी पाठशाला: खेल-खेल में वर्णमाला, अंक और सौरमंडल की सीख रहे नौनिहाल
झाँसी:
कभी केवल पोषण और स्वास्थ्य देखभाल तक सीमित माने जाने वाले आंगनबाड़ी केंद्र अब आधुनिक शिक्षा, जिज्ञासा और कौतूहल के जीवंत केंद्र बनते जा रहे हैं। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) श्री रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड की अभिनव पहल पर जनपद में आंगनबाड़ियों को ‘मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र’ के रूप में विकसित करने की एक अनूठी मुहिम शुरू की गई है। इस परिवर्तन का असर बड़ागांव और बबीना विकासखंड के लेवा तथा कोट (बेहटा) जैसे केंद्रों पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है, जहां नौनिहाल अत्याधुनिक सुविधाओं के बीच पढ़ाई कर रहे हैं।
स्मार्ट टीवी और लघु फिल्मों से मिल रही रोचक शिक्षा
मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि जिले के 08 विकास खंडों के 10-10 आंगनवाड़ी केंद्रों को मॉडल केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। ईसीसीई (Early Childhood Care and Education) मॉडल के अनुरूप तैयार इन केंद्रों में बच्चों के लिए स्मार्ट टीवी लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से लघु फिल्मों और आकर्षक चित्रों के जरिए बच्चों को सौरमंडल, सामान्य ज्ञान और अन्य रोचक जानकारियां दी जा रही हैं।
‘BALA’ की अवधारणा: जहां हर दीवार है एक शिक्षक
जिले में अब तक ऐसे 80 मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण को पूरा किया गया है। इन केंद्रों में Building as Learning Aid (BALA) की अवधारणा को जमीन पर उतारा गया है। इसके तहत आंगनबाड़ी भवनों की दीवारों, दरवाजों और फर्श को शिक्षण माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। दीवारों पर बनी हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, अंक आकृतियां, जीव-जंतु और स्थानीय परिवेश के चित्र बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अनूठा अवसर दे रहे हैं। अब आंगनबाड़ी भवन स्वयं एक शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं।
आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं नए केंद्र
मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की हर जरूरत का विशेष ध्यान रखा गया है। यहां निम्नलिखित अत्याधुनिक और बाल-सुलभ सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं:
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आकर्षक और रंगीन फर्नीचर: बच्चों के बैठने और लिखने-पढ़ने के लिए रंग-बिरंगी टेबल और कुर्सियां।
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बुक कॉर्नर और खेलकूद: बच्चों के लिए कहानियों की किताबों का कोना और मनोरंजन के लिए झूले।
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स्वास्थ्य और स्वच्छता: बाल-सुलभ शौचालय, पेयजल के लिए आरओ और हाथ धोने की बेहतर व्यवस्था।
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पोषण वाटिका और हरियाली: केंद्र परिसर में बच्चों के लिए बगीचा और पोषण वाटिका, साथ ही बाहरी दीवारों पर सुंदर पेंटिंग।
मजबूत हो रही भविष्य की नींव
आंगनबाड़ी केंद्रों का यह कायाकल्प राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर पूरी तरह साकार कर रहा है। शिक्षा, पोषण और सुरक्षा का यह अनूठा संगम झाँसी के नौनिहालों के भविष्य को एक नई दिशा दे रहा है, जिससे एक सशक्त और विकसित समाज की मजबूत नींव पड़ रही है।
