एमपी में कुछ दिनों से चल रहा था निमाड का प्रसिद्ध गणगौर का महापर्व का हुआ समापन ! वही दुसरी तरफ जिले के चारो और गणगौर माता को नम आंखों से बिदाई देते हुए भक्तजनों में भावुकता के पल नजर आए है! दर्शल निमाड आंचल में कई वर्षों से चली आ रही है , धार्मिक कार्यक्रम की इस परंपरागत को शिव पार्वती के प्रसंग के रूप मनाते आ रहे हैं।तथा इस कार्यक्रम की मधुर बेला मे खरगोन जिले की भगवानपुरा तहसील के ग्राम बन्हैर मे शिव पार्वती के प्रसंग एंव पाणीग्रहण संस्कार कर 1 दिन के लिए माता को रोका जाता हैं, और दुसरे दिन माता का भण्डारा कराकर शाम के समय माता को बिदा किया जाता है। इसके अंतर्गत माता को नदी या बावडी मे विसर्जित किया जाता है। आपको बता दु कि , गणगौर पर्व पुरे निमाड क्षेत्र में प्रसिद्ध है, अंचल ग्रामीणों के मुताबिक ऐसा माना जाता हैं, कि चारो बहनो के नाम से सुप्रसिद्ध है, गणगौर! जिसमें गणगौर, रोहिणीबाई, संहिताबाई और रणुबाई यह 4 देविया पृथ्वी पर 4 दिन अपने पतियो ब्रह्मा, विष्णु,महेश और चन्द्र देव से इजाजत लेकर चैत्र महीने में अपने पिहर रहने के लिये आती है, और यह 4 बहने गली में पुजाई जाती है! और 4 दिन रहने के बाद इनके पति जो कि निमाड में ( महेश ) धनियर राजा के नाम से और भगवान विष्णु ईश्वर तथा ब्रह्मा राजा और चन्द्र राजा के नाम से विख्यात है! धनियर राजा के साथ में गणगौर माता, चन्द्र देव के साथ रोहिणी ,ईश्वर राजा के साथ रणुबाई और ब्रह्मा राजा के साथ में ब्रह्माणी की होती हैं, बिदाई! ब्रह्मा,विष्णु, महेश और चन्द्र देव इन चारो देवो की महिमा गली में अपरंपार बताई गयी है! और कहा जाता हैं, कि रणुबाई के आंगन में नीम का पेड़ है, जिसके निचे एक कपिला नाम की गाय बंधी होती हैं, जो कि न तो चारा खाती है, और ना हि पानी पीती है, लेकिन फिर भी वह सवा मण दुध देती हैं! यही पर सब सखिया एक दूसरे से कहती है, कि चल सखी माता के दर्शन के दर्शन के लिए! और सबसे बडी मानी जाती है, गणगौर माता!
संवाददाता दिग्विजय सिंह कि रिपोर्ट