अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस (दिनाँक 01.05.2024) को लोक समिति जिला उमरिया साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था वातायन।*
*रिपोर्टर विजय कुमार यादव*
*पत्रकार, एवं समाज सेवी संगठनों के प्रतिनिधियों के द्वारा संयुक्त रूप से मजदूरों को तिलक।*
*लगाकर व श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।*
असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की पीड़ा बयां करते हुए शम्भू सोनी पागल ने कहा – कभी दिखाया नेह स्वार्थ वश । कभी बढ़ा ली मुझसे दूरी । सूखे मेरा पसीना इससे पहले नहीं मिली मजदूरी ॥
शेख धीरज ने कहा – असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को बहुत कम मजदूरी मिलती है । इससे उनके परिवार का ठीक से भरण पोषण नहीं हो पाता है।
मजदूर दिवस के अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं संस्कृति कर्मी संतोष कुमार द्विवेदी जी ने कहा – मजदूर एकता जिन्दाबाद ! मई दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
वैश्वीकरण और उदारीकरण की आँधी ने मजदूरों के हित में विश्व स्तर पर जो अर्जित किया गया था उसे नेस्तनाबूद कर दिया है । भारत में 1991 के बाद जो अर्थ नीति लागू हुई , उसके बाद से ही श्रमिक संगठनों को अप्रसांगिक बना देने की जो शुरुआत हुई और वह मोदी सरकार तक आते – आते समाप्त प्राय हो गई है । उसकी रही – सही कसर कोविड – 19 के दौरान सारे महत्वपूर्ण कानूनों को जो श्रमिकों कोसुरक्षा प्रदान करते थे । निलंबित कर दिया गया । काम के घण्टे बढ़ा दिए गए हैं और मजदूरी घटा दी गई है। यह मजदूरों के प्रति किए जा रहे अन्याय की इन्तेहा है। सरकारी नीतियों और कानूनों के कारण बेरोजगारी और आर्थिक विषमता बढ़ी है। यह खतरनाक संकेत है जो दुनिया को अशांति और असुरक्षा की ओर धकेल रहे हैं । अनिल कुमार मिश्र ने कहा – गंगाजल से कम नहीं श्रमिक स्वेद की धार गैंती हँसिया फावड़ा श्रमिकों के शृंगार । । भूपेन्द्र त्रिपाठी ने कहा – असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को बहुत कम मजदूरी मिलती है । इनकी मजदूरी सरकारी क्षेत्र के मजदूरों की मजदूरी को लक्ष्य करके तय की जानी चाहिए । राजकुमार महोबिया ने कहा – हमको गिनकर रोटियां उन्हें अघाते पेट पूछें गैंती फावड़ा बोलो मुंशी मेट ॥ प्रेमशंकर मिर्जापुरी ने कहा – धन्ना सेठ हैं लेकिन यही इनकी कहानी है । मजूरों की मजूरी देने में क्यों आना -कानी है । देवेन्द्र सिंह ने कहा – असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की मजदूरी व सरकारी क्षेत्र के मजदूरों की मजदूरी में जमीन – आसमान का अन्तर है । क्या ये मजदूरों के प्रति समानता है..?
जुबेर शेख ने कहा – जिसने तुम्हारा घर बनाया है उसके हाथ मत काटो उसका सुख – दुख दर्द सब अपने साथ बाटो ॥
शिवानंद पटेल ने कहा – असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की पीड़ा को समझना होगा । उनके वाजिब हक की मजदूरी देनी होगी । करन सिंह ने कहा – असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के श्रम का उचित पारिश्रमिक नहीं मिल पा रहा है।
सम्पत नामदेव ने कहा – मेहनत कश मजदूर -किसानों ने जो अन्न उगाया । उसी अन्न को मेहनत करके भोजन गया पकाया । भोजन से पहले श्रम के प्रति हम सम्मान जताएं । कोई भूखा नहीं रहे यही सोच के खाएं । लोक समिति जिला उमरिया के अध्यक्ष राम लखन सिंह चौहान ने कहा – असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को बहुत कम मजदूरी मिलती है। जबकि सरकारी क्षेत्र के कालरी श्रमिकों को इनकी तुलना में बहुत अधिक मजदूरी मिलती है। यह आर्थिक विषमता पैदा कर रही है । इसे खत्म करना होगा । दोनों की मजदूरी में नाममात्र का अंतर होना चाहिए । तभी हम भारत में स्वस्थ समाज की स्थापना कर सकते हैं और तभी समानता के अधिकार का अर्थ सार्थक होगा । असंगठित मजदूर….
फटी एड़ियों की विवाई कंधे चिलक रहे हैं । फिर भी उठाए बोझ देखो वो चल रहे हैं ।
राम लखन सिंह चौहान
अध्यक्ष
लोक समिति जिला – उमरिया
मध्यप्रदेश