समीक्षा बैठक में सीएम चंपाई सोरेन के तीखे तेवर, कहा-तय समय में होना चाहिए म्यूटेशन
बेवजह 90 दिन से ज्यादा म्यूटेशन लटकाने वाले सीओ अब नपेंगे, सीएम बोले-डीसी कार्रवाई का प्रस्ताव भेजें
Indian TV News हजारीबाग संवाददाता
हजारीबाग झारखंड के कई जिलों में म्यूटेशन के मामले लगातार लंबित हो रहे हैं। जबकि आवेदन के 30 दिन के भीतर म्यूटेशन हो जाना चाहिए। अब मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने इस मामले में सख्त कदम उठाया है। बुधवार को हुई समीक्षा बैठक में सीएम ने कहा-अधिकारी सुनिश्चित करें कि म्यूटेशन तय समय सीमा के भीतर हो। अंचल कार्यालयों में म्यूटेशन के हजारों मामले बिना किसी कारण के लंबे समय से लंबित हैं। अधिकारी न तो इसे निष्पादित कर रहे हैं और न ही इसे रद्द कर रहे हैं। यह गंभीर विषय है। संबंधित जिले के डीसी ऐसे अंचल अधिकारी (सीओ) को शोकॉज करें, जो बिना कारण के 90 दिन से अधिक समय से म्यूटेशन लटकाए हुए हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव भेजें। सरकार उन सीओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।
सीएम ने कहा कि कई इलाकों में जमीन की गलत तरीके से खरीद-बिक्री के मामले भी सामने आ रहे हैं। इस पर हर हाल में रोक लगाएं। इसमें जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। बैठक के बाद सीएम ने कहा कि उन्होंने गहराई से योजनाओं की समीक्षा की। 2019 में गठबंधन सरकार बनने के बाद सरकार ने योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में काम किया। बिजली की बुरी स्थिति और अपराध के सवाल पर कहा कि ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है।
90 दिन से अधिक लंबित हैं म्यूटेशन के 4492 केस
राज्य में बिना कारण के म्यूटेशन के 4492 मामले 90 दिन से अधिक समय से लंबित हैं। इनमें सामान्य म्यूटेशन के 3394
और सुओ-मोटो म्युटेशन के 1098 मामले हैं। सुओ मोटो म्युटेशन के सबसे ज्यादा मामले गिरिडीह, हजारीबाग, रांची, साहेबगंज और पलामू में तो सामान्य म्युटेशन के ज्यादा मामले हजारीबाग, रांची, गिरिडीह, पलामू और साहिबगंज में हैं। समीक्षा के दौरान उन 50 अंचलों की सूची भी उपायुक्तों को दी गयी, जहां सबसे अधिक म्युटेशन के मामले लंबित हैं। डीसी को जांच कर एक सप्ताह के भीतर ऐसे सीओ पर कार्रवाई का प्रस्ताव भेजना है।
अबुआ आवास योजना में लापरवाही की तो नपेंगे अफसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि अबुआ आवास योजना में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने पहले चरण में स्वीकृत दो लाख आवास और इसकी पहली किस्त की राशि जारी होने के बाद आवास निर्माण के प्रगति की जानकारी ली। इसमें तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस योजना के लाभुक गरीब और जरूरतमंद होते हैं। ऐसे में उन्हें न्यूनतम दर पर बालू जैसी निर्माण सामग्री उपलब्ध कराएं। लाभुकों के चयन में पारदर्शिता बरतें। जिनका काम संतोषजनक है, उन्हें दूसरी किस्त जारी करें।
सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में स्थाई शिक्षक नियुक्त करें
चंपाई ने कहा कि सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस राज्य सरकार का महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। इन स्कूलों में स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करें। इन स्कूलों का रिजल्ट 100 फीसदी हो, यह भी सुनिश्चित करें। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। सभी जिलों के डीसी इन स्कूलों में मिल रही सुविधाओं का निरंतर मॉनिटरिंग करें। इसे निजी स्कूलों की तरह अपग्रेड करें।
चापानल लगा कर खानापूर्ति न करें, लोगों को पानी भी मिले
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर पंचायत में 10 ड्रिल चापानल लगाने की योजना स्वीकृत है। लेकिन चापानल लगा कर खानापूर्ति न करें। पानी मिले, यह भी निश्चित हो। साथ ही अबुआ आवास योजना से शौचालय निर्माण को भी जोड़ें। राज्य के जो गांव ओडीएफ प्लस घोषित हो चुके हैं, वहां और बेहतर तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में पहल करें। आंगनबाड़ी केंद्रों में भी नल जल की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
सीएम गंभीर बीमारी योजना के प्रचार-प्रसार का निर्देश: मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना का ग्रामीण इलाकों में
प्रचार प्रसार करें ताकि इसका अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सके। साथ ही उन्होंने कहा कि 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर कई शिकायतें लगातार सामने आ रही है। जरूरतमंदों को इसका समय पर लाभ नहीं मिल पाता है। इसके संचालन से संबंधित शिकायतों को जाँच कर इसे व्यवस्थित करना सुनिश्चित करें।