ऑफिसों में समय काट रहे वन रक्षकों की होगी फील्ड में तैनाती
दतिया। वन विभाग के कार्यालयों में अटैच किए गए वन रक्षकों और वन पाल को अब फील्ड में भेजा जाएगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक भोपाल एचएस मोहंता द्वारा 7 मार्च को जारी आदेश के अनुसार, जो कर्मचारी अब तक कार्यालयों में समय बिता रहे थे, उनकी ड्यूटी जंगल और फील्ड में लगाई जाएगी। लेकिन 9 दिन बीत जाने के बावजूद दतिया में इस आदेश का पालन नहीं किया गया है।
ऑफिसों में क्यों अटैच हैं वन रक्षक?—-
सूत्रों के मुताबिक, दतिया में कई वन रक्षक और वन पाल वर्षों से कार्यालयों में अटैच होकर बैठे हैं। फील्ड में जाने के बजाय ये कर्मचारी दफ्तरों में फाइलों के बीच समय गुजार रहे हैं। इस तरह की अटैचमेंट स्थानीय अधिकारियों की मेहरबानी से होती है, ताकि ये कर्मचारी आराम से रह सकें और वास्तविक ड्यूटी से बच सकें।
इन कर्मचारियों की होनी थी तैनाती—-
वन विभाग के विभिन्न दफ्तरों में अटैच कर्मचारियों की सूची कुछ इस प्रकार है:
रामेश्वर राजपूत (वन पाल) – रेंज ऑफिस दतिया
दीपेन्द्र राजपूत (वन रक्षक) – व्यय शाखा
धर्मेंद्र लाक्षाकार (वन रक्षक) – स्टेनो शाखा
प्राची तिवारी (वन रक्षक) – स्थापना शाखा
सुमन प्रजापति (वन रक्षक) – आवक-जावक शाखा
धर्मेंद्र दांगी (वन रक्षक) – ड्राफ्ट मैन शाखा
करुणा निधि चतुर्वेदी (डिप्टी रेंजर) – SDO कार्यालय दतिया
बृजमोहन छिरौलिया (वन रक्षक) – वन परिक्षेत्र कार्यालय गोराघाट
प्रमोद शर्मा (वन रक्षक) – वन परिक्षेत्र कार्यालय सेवड़ा
DFO ने क्या कहा?—
जब इस मामले पर DFO दतिया मौ. माज से पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मुझे अभी तक प्रधान मुख्य वन संरक्षक का पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। हम पत्र को मंगवा रहे हैं। कौन कहां अटैच है, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है।”
आदेश के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?—
वन विभाग में कर्मचारियों की इस तरह की अटैचमेंट व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं। जब जंगलों की सुरक्षा के लिए वन रक्षकों की जरूरत है, तो वे दफ्तरों में बैठकर समय क्यों बिता रहे हैं? क्या प्रशासन इस आदेश को नजरअंदाज कर रहा है, या फिर किसी दबाव में इसे लागू नहीं कर रहा?
क्या होगा आगे?—
अब देखना यह है कि क्या प्रधान मुख्य वन संरक्षक भोपाल का आदेश दतिया में लागू होगा या फिर यह आदेश भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। क्या वन विभाग इन कर्मचारियों को फील्ड में भेजेगा या फिर कार्यालयों में आराम करने की यह व्यवस्था जारी रहेगी? जनता और पर्यावरण प्रेमियों की निगाहें इस फैसले पर टिकी हुई हैं।