इंदिरा गांधी नहर जो दर्जन भर जिलो के लोगों की प्यास बुझाती है।आर डी 507 हैड के पास नहर मे आया बड़ा कटाव
बीकानेर जिले के छतरगढ़ से निकलने वाली इंदिरा गांधी नहर की आरडी 507 हेड के आगे एक बार फिर से गंभीर कटाव आया है।लेकिन हैरानी की बात यह है कि नहरबंदी के बावजूद इस खतरनाक स्थिति की अनदेखी की गई। विभागीय लापरवाही के चलते क्षेत्र के किसानों की चिंता गहरा गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र पहले भी कई बार कटाव की चपेट में आ चुका है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिलते रहे। इस बार भी नहरबंदी के दौरान न मरम्मत हुई, न ही कोई सुरक्षात्मक उपाय किए गए। नतीजतन, अब फिर वही हालात सामने हैं।
*मौके पर पहुंचे AEN ने बजट का रोना रोया*
कटाव की जानकारी मिलते ही सहायक अभियंता,श्रवण कुमार मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया, लेकिन कार्य के लिए बजट की कमी का हवाला देते हुए दिखे। इससे पहले भी कई बार इस तरह की बात कहकर जिम्मेदारी से अधिकारी बचाव कर लेते हैं ।
*युवा मंडल की चेतावनी, “अब नहीं सहेंगे”*
कैप्टन चंद्र चौधरी युवा मंडल के किशोर जाखड़ और उनकी टीम ने लगातार नहर की स्थिति को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कई बार सूचना दी, लेकिन हर बार उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया। अब मंडल ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
*किसानों की फसलें खतरे में*
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में सैकड़ों बीघा फसलें खतरे में पड़ सकती हैं। पहले ही जल प्रबंधन की अनदेखी से क्षेत्र के किसान परेशान हैं और अब यह लापरवाही स्थिति को और भयावह बना रही है।
*प्रशासन की चुप्पी, सवालों के घेरे में जिम्मेदार*
प्रशासनिक उदासीनता और सिंचाई विभाग की निष्क्रियता से ग्रामीणों में आक्रोश है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नहरबंदी का फायदा किस लिए उठाया गया, जब आवश्यक मरम्मत ही नहीं की गई?
ग्रामीणों का कहना है कि छतरगढ़ इंदिरा गांधी नहर के अधीक्षण अभियंता का मुख्यालय है।पर फिर भी अधीशाषी अभियंता,कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता कोई भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह नही करते।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे व्यापक आंदोलन करेंगे।