संवादाता विकाश विश्वकर्मा शहडोल
अन्य विभागों उद्यानिकी, मत्स्यपालन, पशु चिकित्सा विभाग, मण्डी तथा सहकारिता विभाग की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि खेती को लाभ का धंधा बनाने हेतु कृषि लागत को कम करने तथा खेती की नई तकनीकों, उन्नत बीज, कृषि यंत्रों का उपयोग, संतुलित एवं आवश्यकता के अनुसार रासायनिक उर्वरक तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने के संबंध में निर्देश दिए।
बैठक में उप संचालक कृषि आरपी झारिया, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, डॉ आरके पाठक, सहायक संचालक मत्स्य राजेश श्रीवास्तव, सहायक संचालक उद्यानिकी झनक सिंह मरावी, कृषि वैज्ञानिक डॉ प्रजापति, उपायुक्त सहकारिता, मण्डी सचिव सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
कलेक्टर ने कहा कि मिट्टी परीक्षण से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर किसानों को कमी वाले पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए उपयोग किए जाने वाले रासायनिक उर्वरक की मात्रा की जानकारी दी जाए। जिले में उर्वरक का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध रहे, इसके लिए आवश्यकता का आकलन करके पहले से ही डिमांड कर ली जाए।
जिले में बड़ी संख्या में खेत तालाब बनाए जा रहे हैं। इस खेत तालाबों की मेड़ों में अरहर की खेती, उद्यानिकी फसलें तथा कटहल आदि के पौध रोपित कराए जाएं। जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
आपने कहा कि जिले में ऐसे जलाशय जहां पानी उपलब्ध है किन्तु सिंचाई का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहां स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा दिया जाए तथा उद्यानिकी एवं बगीचे तैयार कराने की गतिविधियां विस्तारित की जाएं।
कलेक्टर ने कहा कि कृषि अभियांत्रिकी विभाग के माध्यम से संचालित कस्टम हायरिंग संेटरों को बहुआयामी कराया जाए तथा उनकी सेवाओं का लाभ आमजन को भी उपलब्ध कराया जाए। बैठक में कलेक्टर द्वारा मत्स्यपालन, पशुपालन, उद्यानिकी, सहकारिता, कृषि उपज मण्डी, बीज निगम, मार्कहेड, तथा डीएमओ की गतिविधियों की भी समीक्षा की गई।