वैश्य समाज का अध्यक्ष पहले एक मंत्री के घर से तय किया जाता था परन्तु अब ऐसा नही होगा, यही नही समन्वय समिति के चन्दे का हिसाब समिति के कार्यकाल खत्म होने के पश्चात कोषाध्यक्ष देगा: रवि गुप्ता
सहारनपुर: वैश्य समाज के चन्दे को लेकर उठ रहे सवाल पर अब कतिथ रूप से महासचिव ने चुप्पी तोड़ते हुए कई चोकाने वाले खुलासे किए, उनके अनुसार वैश्य समाज के लोगो को सदैव एक मंत्री रहे नेता द्वारा दबाया गया, तथा सदैव मनमाना अध्यक्ष उनकी कोठी से ही अस्तित्व में आता था जिसका इस्तेमाल व सांगठनिक रूप से स्वयं की राजनीति चमकाने के लिए करते थे, समन्वय समिति के महासचिव ने यह भी बताया कि समिति के चन्दे का उनसे कोई लेना देना नही है बल्कि चन्दे का हिसाब समिति का कोषाध्यक्ष देगा, अब समिति का कार्यकाल पूरा हो गया बताया जा रहा है ऐसे में नई समिति के गठन व हिसाब को लेकर चर्चाओ का दौर जारी है, जिस बात का रहस्योद्घाटन महासचिव द्वारा किया गया उसके अनुसार क्या फिर एक नेता की कोठी से अध्यक्ष का नाम चला कर एक निष्क्रिय अध्यक्ष मिलेगा? या फिर समाज के बीच से ही किसी योग्य व्यक्ति को इसकी कमान सौपी जाएगी, देखना बड़ा दिलचस्प होगा? अब जहां एक ओर वैश्य समाज मे समाज के नाम पर फैली विसंगतियों को लेकर चर्चाये है वही इस बात की भी चर्चा गर्म है कि वैश्य समाज में समवय समिति के वर्चस्व की लड़ाई को लेकर भी अन्तर्द्वन्द चल रहा है, तथा यह भी स्वाभाविक है कि इस बार वैश्य समाज मे दो फाड़ हो सकते बताये जा रहे है, अब क्या होगा? क्या फिर किसी नेता के द्वारव कोई निष्क्रिय अध्यक्ष बनाया जाएगा अथवा समाज मे किसी योग्य विकल्प की तलाश की जाएगी जो कतीथ रूप से कोठी से घोषित न किया गया हो? बताया जा रहा है कि शीघ्र ही वैश्य समाज के जिम्मेदार लोगों की एक बैठक राजनेताओ को दर किनार कर की जाएगी। समाज के प्रबुद्ध लोगो का कहना है कि अब कोई योग्य व्यक्ति ही सामने आना चाहिए, ऐसे व्यक्ति के कहने से कोई अध्यक्ष स्वीकार्य नही जो पिछले कई वर्षों से वैश्य समाज की राजनीति समाज के नाम पर करने के साथ समाज के हित मे कोई कार्य न करे तथा कई पार्टियों में भ्रमण करने के बावजूद किसी भी पार्टी में वैश्य समाज को उचित प्रतिनिधित्व न दिलवा सका हो।
आलोक अग्रवाल
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रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़