हिंदुत्व की राजनैतिक विचारधारा के लिये दलित वर्ग के युवाओं की बलि बंद होनी चाहिये
-ः डॉ. विक्रम चौधरी
घटना का विवरण ;संक्षिप्तए तथ्यात्मक रूप मेंद्धरू
ललितपुर उ.प्र. निवासी युवराज बंशकार की चाकू मारकर हत्या कर दी गई, जबकि रोहित सेन और संजू वर्मा पर भी जानलेवा हमला किया गया है और वे गंभीर रूप से घायल हैं। यह घटना युवा हिंदू उत्सव समिति द्वारा आयोजित धार्मिक शोभायात्रा के दौरान हुई।
यह शोभायात्रा सिंधी कॉलोनी से माता मंदिर चौराहे तक निकाली जा रही थी। डीजे पर नाचते समय अचानक कुछ हथियारबंद लोगों ने युवकों पर हमला कर दिया। घटना के बाद आरोपी पीयूष का नाम सामने आया है। पुलिस ने अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
इस गंभीर घटना से जुड़े प्रमुख सवाल :-
ऽ कानून-व्यवस्था पर सवाल :- एक धार्मिक रैली में खुलेआम हथियार लेकर हमला कर देना प्रशासन की भारी चूक को दर्शाता है।
ऽ धार्मिक आयोजनों में हिंसा :- धार्मिक शोभायात्राएं अब असामाजिक तत्वों के लिए हिंसा का मंच क्यों बनती जा रही हैं?
ऽ बेरोजगार युवाओं का दुरुपयोग :- बेरोजगार युवाओं को धार्मिक जुनून में शामिल कर असहिष्णुता और उन्माद फैलाने की साज़िश चिंताजनक है।
ऽ धार्मिक रैलियों में हथियारों का प्रदर्शन :- क्या अब धार्मिक आयोजनों में हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन सामान्य होता जा रहा है?
ऽ धार्मिक यात्राओं में नषे की निर्बाध आपूर्ति संस्थागत प्रयोग है। इसे मात्र संयोग की नजर से नहीं देखना चाहिये। यह दंगो के लिये एक पार्टी विषेष द्वारा अपना कैडर तैयार करने की साजिष है।
ऽ हथियारों का खुलेआम प्रदर्षन और उपलब्धता पुलिस की निष्क्रियता का प्रमाण है और यह पुलिस इंटेलीजेंस की विफलता भी।
ऽ ऐसा होने देना पुलिस की मजबूरी क्यों बन गया है ? क्या म.प्र. की भाजपा सरकार पुलिस पर अनुचित दबाव बनाकर ऐसा होने के लिये मजबूर कर रही है।
ऽ ऐसे धार्मिक जुलूसों में गरीब और दलित वर्ग के युवाओं का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है। क्या, निचली और पिछडी जातियों के युवा हिदुत्व की समिधा में बलि बनाये जाने के लिये है।
ऽ भाजपा और संघ के द्वारा लगातार भारतीय संविधान, सर्वोच्च न्यायालय और आजादी के आंदोलनों के नायकों में प्रमुख रूप से बाबा साहब अंबेडकर जी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करके इन्हें विवादित बनाया जा रहा है जिससे आम युवा और भारतीय समाज और लोकतंत्र के प्रति निराषा भरकर दंगों के लिये व्यापक मानसिकता को तैयार किया जा सके।
ऽ युवाओं को रोजगार, षिक्षा एवं वैज्ञानिक चिंतन से दूर करके उन्हें हिंसक और तालिबानी मानसिकता के झुंड में बदलने का यह संघी प्रयोग है।
ऽ हिंदुत्ववादी मानसिकता अक्सर धार्मिक जुलूस का आयोजन मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में क्यों करते है। जबकि हिंदु त्योहारों के अनुसार कोई विषेष तिथि और त्योहार नहीं होता है। फिर ऐसे उन्मादी जुलूस निकालने का क्या औचित्य है।
समाज और प्रशासन दोनों को यह गंभीर आत्मचिंतन करना होगा कि क्या धार्मिकता के नाम पर युवाओं को नफरत, हिंसा और हथियार थमाने की यह संस्कृति स्वीकार्य है? क्योंकि समाज और संवैधानिक संस्थाओं से कुछ अपेक्षा की जा सकती है वरना संघ और भाजपा समावेषी और सहिष्णु भारतीय समाज को विकृत कर रही है।
“बेरोजगार युवाओं को धर्म के नाम पर पैसे और नशे का लालच देकर रैलियों में बुलाया जाता है। उन्हें हथियार थमाकर उग्र प्रदर्शन के लिए उकसाया जाता है। यह देश को धर्म के नाम पर नफरत और हिंसा की ओर धकेलने का घातक प्रयास है। इसी कारण महज 17 वर्षीय एक दलित किषोर युवराज वंशकार को अपनी जान गंवानी पड़ी। ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन को धार्मिक रैलियों और प्रदर्शनों के प्रति सख्त रुख अपनाना होगा। धार्मिक रैलियों में हथियारों का क्या काम? यह गंभीर सवाल है, जिस पर समाज और सरकार दोनों को सोचने की ज़रूरत है।“
उक्त घटना में दो अन्य घायलों के बयान है जो स्पष्ट कह रहे हैं कि घटना रैली के दौरान की है। अतः यह सवाल उठता है कि :-
रैली के बीच में हथियारबंद झुंड कहां से आ गए?
सुरक्षा व्यवस्था कहां थी?
सादर प्रकाषनार्थ
मीडिया विभाग