संवादाता विकाश विश्वकर्मा शहडोल
जल स्त्रोतों के पुनर्जीवन हेतु किए गए कार्य लाई रंग, पानी से हुए लबालब
नगरी शहडोल का बाणगंगा कुंड और राम जानकी मंदिर है यह मंदिर अत्यंत प्राचीन मंदिर है मंदिर के सामने ही विराटेश्वर महादेव का मंदिर है जो वस्तुकला का प्रमाण है उदाहरण है बाणगंगा कुंड बहुत महत्वपूर्ण है यह माना जाता है कि महाभारत कालीन में जब भीष्म पितामह के लिए अर्जुन ने बाणों का संधान किया था बाण के संधान से इस कुंड का उद्गम हुआ है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रेरणा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सुप्रयासों से जल गंगा संवर्धन अभियान 30 जून तक चलाया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत संभागीय मुख्यालय शहडोल के बाणगंगा कुंड में जनप्रतिधियों, अधिकारियों मीडियाकर्मी, जनमानस द्वारा सफाई का कार्य किया गया था। कुंड को अब नया जीवनदान मिला है। पारंपरिक कुंडों में जल स्तर बढ़ गया है और उनका पानी अब स्वच्छ एवं सुंदर दिखाई दे रहा है। वर्षा जल संचयन की यह तस्वीर न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को निखार रही है, बल्कि जल संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत भी दे रही है।
जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत संभागीय मुख्यालय शहडोल के मोहनराम तालाब में भी वृहद स्तर पर सफाई का कार्य किया गया था। स्वच्छ पानी से भरे तालाब न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से लाभकारी हैं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्व रखते हैं। अब यह स्थल स्थानीय निवासियों और आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।
जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत नगरीय निकायों एवं ग्राम पंचायतों द्वारा सूखे पड़े तालाबों के पुनर्जीवन हेतु किए गए कार्य अब रंग ला रहे हैं। पहली ही बारिश में क्षेत्र के पुराने तालाब और जलस्रोत लबालब भर गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है। अभियान के तहत तालाबों की सफाई, गहरीकरण, मिट्टी हटाने, जल निकासी सुधारने एवं वर्षा जल के संग्रहण की दिशा में ठोस प्रयास किए गए। परिणामस्वरूप वर्षों से उपेक्षित पड़े जलस्रोत अब जल संरक्षण के उदाहरण बन गए हैं।