प्रशांत सिंह सिसोदिया ब्यूरो चीफ जिला डिंडोरी मध्य प्रदेश,,,,,,,,,,,
मूलभूत सुविधाओं से वंचित है गाड़ासरई।।
डिंडोरी जिले के वेवसाइक नगरी गाड़ासरई में आजादी के बाद से आज तक मूलभूत सुविधाओं से दूर है नगर।गाड़ासरई जिले के होनहार ग्राम पंचायत होने के बाद भी ऐसे तमाम समस्याओं का सामना लोगों को झेलना पड़ता है।नगर गाड़ासरई से अमरकंटक जबलपुर मुख्य हाइवे पर ना तो सड़क की दोनों ओर ना तो नाली है और ना बस स्टैंड, ना सुलभ की बेवस्था ग्रामीण, आस पास छेत्र,और बाहरी लोगों को आने जाने वाले लोगों को संकट का सामना करना पड़ता है।जिले में गाड़ासरई एक ऐसा स्थान है जंहा से कई राज्य,जिलों का संपर्क रहता है गाड़ासरई से बस की सुविधा देखे तो गाड़ासरई से महाराष्ट्र नागपुर, गाड़ासरई से प्रयागराज, गाड़ासरई से कानपुर, लखनऊ,गाड़ासरई से छत्तीसगढ़ रायपुर, बिलासपुर गाड़ासरई जबलपुर ऐसे तमाम जगहों में आवागमन है।
नही है आने जाने वाले यात्रियों,लोगों के लिए सुविधा।मुख्य बात तो ये है कि दूर दूर से जब बसें आकर खड़ी होती है तो सबसे पहले तो चार बसें खड़ी हो गई तो बाकी का और गाड़ी की मजबूरी होती है कि मुख्य हाइवे में खड़ा होना पड़ेगा क्योंकि जगह का अभाव है सड़क में खड़े होने से ट्रैफिक व्यवस्था भी दुरस्त रहता है आये दिन कोई ना कोई घटना घटित होती रहती है आगे कुछ गाड़ासरई की विकास की ओर बढ़े तो यात्रियों के लिए बस से उतरने में भी समस्या जमीन में नीचे कीचड़ और पानी से लबालब भरा स्टैंड।किसी तरह यात्री बस से उतर भी गया तो उसको पेशाब करने के लिए जगह नही और ना सुलभ की बेवस्था किसी तरह से यात्री इधर उधर जाय भी तो दूसरी ओर बस भी छूटने लगी है आखिर यँहा भी समस्या।और तो और पुरुषों को ले देके कोई जगह मिली भी तो महिलाओं को नही मजबूरी बस महिलायें दो बस के बीच ही पेशाब के लिए बैठना पड़ता है ये गाड़ासरई नगर की बहुत बड़ी दुर्भाग्य पूर्ण समस्या बनी रहती है अब कुछ दूर और चले तो पेट्रोल पंप के पास से मुख्य हाइवे के दोनों तरफ स्टेट बैंक तक नाली ना होने से घरों का गंदा पानी साथ ही बारिश का पानी पूरा रोड में ही भरता है जिससे दुकान दारों को भी समस्या होती है साथ ही आने जाने वाले लोगों को और तो और लाल चौक हो या बस स्टैंड इन जगहों में तो पानी के कारण रोज कोई ना कोई दुर्घटना होती है मोटरसाइकिल वाले कंही ना कंही पानी के कारण स्लिप होने से शिकार होते है।
श्रद्धालुओं की समस्या बस स्टैंड से महज 2,किलोमीटर की दूरी पर माँ नर्मदा जी का स्थान है जंहा रोज श्रद्धालुओं का जाना होता है पर पहले वो घर के गंदे पानी को खुंदते है फिर कंही नर्मदा नदी तक पहुंच पा रहे है यही रवैया नगर में लाल चौक में खेर माई का स्थान है साथ ही उसी रोड में में 400 मीटर की दूरी में बजरंग बली का मंदिर है पर जब तक श्रद्धालू बतरूम का और घर के गंदे पानी का शिकार नही हुए तब तक उनकी आस्था अधूरी है।
आस पास और नगर के सज्जनों का कहना है कि एक ओर स्वच्छ भारत मिशन चल रहा है और हमारे नगर की समस्या आजादी के बाद से आज तक विकास से कोसों दूर जाते जा रहा है।
वंही नगर के ही कुछ प्रतिष्ठित ब्यक्तियों का कहना है कि चाहे ब्लॉक हो या जिला हो या प्रदेश बड़े बड़े राजनीतिक दलों के पदाधिकारी भी इसी नगर छेत्र से होते आये है पर अपना विकास के सिवा आज तक कुछ नही कर पाए चाहे कांग्रेस हो या भाजपा हो या और भी अन्य दलों के नेता पदाधिकारी गढ़ हो पर इन समस्याओं की ओर आज तक किसी की नजर नही जाती और तो और खुद भी इन्ही सब समस्याओं से खुद भी जूझते है पर खामोसी के आलम का मजा ले कर आनंद ले रहे हैं।
जिले में और भी यदि देखा जाय तो चाहे शहपुरा हो या करंजिया,बजाग,या फिर जिला मुख्यालय पर सायद गाड़ासरई नगर से तुलना करें तो सर्मसार करने वाली बात है
कुछ दूर और चले तो जिस दिन बाजार का दिन रविवार होता है उस दिन तो यदि जितनी बड़ी भी हस्ती हो या 108,100 डायल जैसे बहानों को गुजरना है तो 500 मीटर का सफर घंटो लग जाता है इसका मुख्य बजह है कि ट्रैफिक की बहुत बड़ी समस्या आखिर यँहा भी समस्या तैयार हो गया दुकान दार अपने स्थाई दुकान तो लगाते है पर बेचारे छोटे छोटे बेयपारी कंहा जाय तो सड़क के दोनों तरफ पटरी में ही दुकान लगा कर धंदा करते है जिससे आने जाने वाहनों को भी समस्या जाती है और ऐसे में ट्रैफिक जाम हमेशा बना रहता है।और प्रशासन कुम्भ करण के नींद में सोई नजर आती है।
जब भी गाड़ासरई थाना हो या कोई भी दफ्तरों में शांति समिति की बैठक हो या कोई भी मुख्य बैठक होती है जिसमे जिले के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहते है उन दिनों अवश्य ही ये सारी समस्याओं के बारे में ग्रामीणों के द्वारा चर्चा होती है और नोट सीट तैयार की जाती है पर सिर्फ और सिर्फ कागजों में चल के राह जाती है लेकिन सच्चाई तो मौके पर देखा जाय तब पता चले कि आखिर वास्तविकता है क्या।।