सोनभद्र समाचार ब्यूरोचीफ नन्दगोपाल पाण्डेय
गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित सप्तदिवसीय गुप्तकाशी दर्शन यात्रा के तीसरे दिन की यात्रा का शुभारंभ ऐतिहासिक विजयगढ़ दुर्ग से हुआ। रात्रि विश्राम के बाद यात्रा प्राचीन संस्कृति और आस्था के प्रतीक स्थलों की ओर अग्रसर हुई। सर्वप्रथम यात्रियों ने मऊ कला स्थित प्राचीन शिव मंदिर, दुर्गा माता शिखर स्थल में दर्शन पूजन कर पुण्य अर्जित किया, तत्पश्चात यात्रा पटना स्थित ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर पहुँची जहाँ विधि-विधान से पूजन-अर्चन संपन्न हुआ।
यात्रा के तीसरे दिवस पहाड़ो में हुई भारी बारिश के चलते मार्गो में पानी बढ़ गया है जिसके चलते यात्रा के मार्ग में परिवर्तन करना पड़ा और रात्रि विश्राम देवानी चुआ में किया गया। यात्रा के समस्त आयोजन को व्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है और कल से यात्रा पुनः पूर्व निर्धारित रूट के अनुसार संचालित की जाएगी।
इस दौरान विजयगढ़ दुर्ग पर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन भी हुआ जिसमें जगतगुरु स्वामी श्री ब्रह्मा देव आचार्य जी महाराज महामंडलेश्वर हेमलता सखी जी एवं देश भर से पधारे संत समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में विजयगढ़ दुर्ग पर हो रहे धार्मिक व सांस्कृतिक अत्याचारों के विरोध में सभी संतों ने एक स्वर में आवाज बुलंद की। लगभग एक माह से बंद पड़े काली मंदिर की पुनः प्राण-प्रतिष्ठा के विषय में गहन विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, यह संकल्प लिया गया कि विजयगढ़ दुर्ग, जो सनातन परंपरा की गौरवशाली धरोहर है, उसे अतिक्रमण व अत्याचार से मुक्त कराकर एक ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर के रूप में विकसित किया जाएगा।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि संत समाज एक सामूहिक समूह बनाकर सरकार से इस विषय में औपचारिक वार्ता करेगा और विजयगढ़ दुर्ग के संरक्षण हेतु ठोस मांग रखेगा। ट्रस्ट के संस्थापक रवि प्रकाश चौबे जी ने सभी संतों, यात्रियों और श्रद्धालुओं का हृदय से आभार प्रकट करते हुए इस अभियान को एक “महा-अभियान” का रूप देने की अपील की। उन्होंने सभी धर्मप्रेमी जनों से विजयगढ़ दुर्ग के उद्धार हेतु एकजुट होकर प्रयास करने का आह्वान किया।
गुप्तकाशी दर्शन यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना एवं संरक्षण का भी एक महान यज्ञ बन चुकी है। इस यात्रा में श्री धाम वृंदावन से पधारे पूज्य स्वामी प्रेमी जी दास जी महाराज स्वामीनारायण दास जी महाराज अयोध्या से पधारे वरुण जी महाराज स्वामी विजय नारायण आचार्य जी महाराज मोनी बाबा मोनी बाबा ध्यानानंद जी महाराज उदल दास जी सहित,मानस मन्दाकिनी सुनीता पाण्डेय जी, अरविन्द पाण्डेय, सौरभ कान्त पति तिवारी, पार्थ सारथी, भोला गिरी, प्रियांशु चौबे, सिद्धनाथ समेत सैकड़ो लोग मौजूद रहे।