नरेश सोनी
इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
ब्यूरो चीफ हजारीबाग।
मनरेगा में 40% कमीशन का खेल: बीडीओ पर मुखिया का अधिकार छीनने का आरोप, मुखिया संघ ने की जांच की मांग
इचाक/हज़ारीबाग: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत इचाक प्रखंड की 19 पंचायतों में बिरसा सिंचाई कूप, टीसीबी (टेंच कम बंड) और डोभा के निर्माण में 40% कमीशनखोरी का गंभीर आरोप सामने आया है। लाभार्थियों का कहना है कि उन्हें काम कराने और भुगतान के लिए ब्लॉक कार्यालय में अपनी जमीन और गहने गिरवी रखकर भी कमीशन देना पड़ रहा है। इस मामले में मुखिया संघ के अध्यक्ष सकेंद्र प्रसाद मेहता ने भ्रष्टाचार चरम पर होने का आरोप लगाते हुए उपायुक्त से हस्तक्षेप की मांग की है।
लाभार्थियों का आरोप: हर स्तर पर कमीशन मनरेगा के लाभार्थियों ने बताया कि डोभा, टीसीबी और बिरसा सिंचाई कूप को ऑनलाइन कराने और कार्य आदेश (वर्क ऑर्डर) जारी कराने के लिए उन्हें बीडीओ और वीपीओ को 20,000 रुपये प्रत्येक देने पड़ते हैं। लाभार्थियों के अनुसार, योजना निर्माण की राशि में वीडीओ 10%, पंचायत सचिव 5%, बीपीओ 10%, रोजगार सेवक 5%, जेई 7%, एई 3% और कंप्यूटर ऑपरेटर प्रत्येक मास्टर रोल से 200 रुपये कमीशन वसूलता है।
लाभार्थियों ने यह भी बताया कि बिरसा सिंचाई कूप, डोभा, टीसीबी योजनाओं में जब तक कमीशन नहीं मिलता, तब तक भुगतान में आनाकानी की जाती है। उन्हें समय पर माप पुस्तिका (मेजरमेंट बुक) भी नहीं मिलती। वे ब्लॉक कार्यालय के चक्कर लगाते-लगाते थक जाते हैं और अंततः कमीशन देने को मजबूर होते हैं। लाभार्थियों का कहना है कि यदि वे कंप्यूटर ऑपरेटर को कमीशन नहीं देते, तो उन्हें “लिंक फेल” होने का बहाना बनाकर दौड़ाया जाता है।
मुखिया संघ अध्यक्ष का गंभीर आरोप
मुखिया संघ के अध्यक्ष सकेंद्र प्रसाद मेहता ने इस पूरे मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रखंड में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। उन्होंने कहा कि मनरेगा में बिना कमीशन के काम करना मुश्किल है।
मेहता ने बताया कि सरकार द्वारा 5 लाख रुपये तक की योजनाओं को मुखिया द्वारा अनुमोदित किया जाता है और मनरेगा श्रमिकों को मुखिया के डिजिटल हस्ताक्षर से ही भुगतान किया जाता है। लेकिन, जब मुखिया पंचायत सचिवालय को ग्राम सभा से पारित मनरेगा योजनाओं को ऑनलाइन करने के लिए कहते हैं, तो वीडीओ और बीपीओ कहते हैं कि “वह हमारा अपना ऑपरेटर है, हम जो चाहेंगे वही होगा।” वे यह भी कहते हैं कि “अगर मनरेगा योजना चलानी है, तो उसे ब्लॉक से ही ऑनलाइन कराना होगा।”
मुखिया संघ की मांग
मुखिया संघ ने उपायुक्त से मांग की है कि इचाक ब्लॉक में वीडीओ और बीपीओ ने मुखिया से मनरेगा कार्यों का अधिकार छीन लिया है। संघ ने अनुरोध किया है कि इस योजना को पंचायत सचिवालय से सुचारू रूप से चलाने का काम किया जाए, ताकि सभी मनरेगा श्रमिकों को समय पर भुगतान मिल सके और लाभार्थियों को योजना का सही लाभ प्राप्त हो।