ब्यूरो चीफ – राकेश मित्र जिला-कांकेर
भीलसीनगर/ हिंदुत्ववादी संगठनों का यह नारा था”भारत में रहना होगा, तो वन्देमातरम कहना होगा”।वन्देमातरम के रचयिता बांग्लाभाषी बंकिमचंद्र थे। जन-गण -मन अधिनायक के रचयिता भी बांग्लाभाषी रवीन्द्रनाथ टैगोर थे। बांग्लाभाषी रवींद्र नाथ टैगोर को ही देश के सबसे पहले नोबल पुरस्कार मिला,देश के सबसे पहला आस्कर पुरस्कार प्राप्त करने वाले भी बांग्लाभाषी ही थे।लेकिन आज भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार(डबल इंजन) बांग्लाभाषियों को बांग्लादेशी घुसपैठिया के नाम पर परेशान कर रही है।
आज जारी एक प्रेस बयान में राजमिस्त्री मजदूर रेजा कुली एकता यूनियन के प्रांतीय उपाध्यक्ष कमल रॉय ने भाजपा सरकार की इस कदमों की तीखी निंदा करते हुए कहा कि भाजपा सिर्फ समाज में नफरत, विद्वेष और विभाजन की राजनीति करती है।बांग्लाभाषियों पर यह आक्रमण भाजपा की विचारधारा की ही एक अभिन्न अंग है। जिस बांग्लाभाषियों के अनेकों मनीषियों( जिस विवेकानंद को भाजपा आदर्श युवा मानती है वो भी बांग्लाभाषी थे, ) ने देश को सम्मान और गौरवान्वित किया है आज भाजपा उसी बांग्लाभाषियों की छबि बांग्लादेशी घुसपैठी के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है।भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता दी गई है जिसमें बंगला भाषा भी है,आज बंगला भाषियों को प्रताड़ित कर भाजपा संविधान की उस मान्यता पर ही हमला कर रही है।संघी विचार एक धर्म,एक भाषा,एक नस्ल* मजदूर नेता ने कहा कि भाजपा जिस संघ की विचारधारा पर चलता है उस संघ की विचार है देश में एक धर्म,एक भाषा,एक संस्कृति होना चाहिए।इसलिए वे अलग धर्म,अलग भाषाभाषी लोगों पर हमला करते है।उनका नारा है”हिन्दू,हिंदी,हिंदुस्तान” यह नारा में ही उनके हिडेन एजेंडा क्या है यह समझा जा सकता है।हिंदुओं की बातें करने वाले अब हिन्दू बांग्लाभाषी लोगों को भी अपना निशाना बना रहे है,क्योंकि वे बांग्लाभाषी है।मुस्लिम लीग और आर एस एस में है समानता उन्होंने कहा कि मुस्लिम लीग और आर एसएस की विचारधारा में समानता है क्यों कि यह दोनों ही संगठन सांप्रदायिक संगठन है।भाषा के नाम पर अगर राष्ट्र का निर्माण होता फिर धर्म के आधार पर बनी पाकिस्तान के टुकड़े होकर बांग्लादेश नहीं बनता।पाकिस्तान में मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में मुस्लिम लीग ही थी जो पाकिस्तान में उर्दू को राष्ट्रभाषा के रूप में थोपना चाहती थी।लेकिन मुजीबुर रहमान के नेतृत्व में मुस्लिम लीग के इस प्रयास का विरोध किया और अंत में बांग्लाभाषा के आधार पर बांग्लादेश का निर्माण किया।आज आरएसएस भी मुस्लिम लीग की तरह देश में एक भाषा को थोपना चाहती है,जो संविधान की बहुलता की नीति को ही नकारता है। बांग्लाभाषा में बातें करने वाले लोगों की संख्या दुनिया में 8 वें स्थान पर है और भाजपा आरएसएस यह साबित करने का प्रयास कर रही है कि बांग्लाभाषा यानी विदेशी मुस्लिम देश का भाषा है।हमारे देश में भाषा के आधार पर राज्यों का गठन हुआ था,भाजपा की पूरे देश में एक भाषा को थोपने की राजनीति उस भाषाई आधार पर बनी राज्य की अवधारणा को भी नकारती है।अगर देश में एक भाषा थोपा जाएगा फिर छत्तीसगढ़ी बोली,प्रदेश के अनेकों आदिवासी बोली बोलने वालों को अपनी मातृभाषा को ही त्यागना होगा।इसलिए वे संघीय ढांचा पर हमला करते है और सब अधिकारों को केंद्रीकृत करना चाहते है।
*निशाने में हैं हर कोई*
भाजपा के निशाने में वो हर कोई है जो उनके विचारधारा के अनुरूप नहीं है।नागरिकता कानून लागू होने के बाद जिस तरह बिहार में चुनाव आयोग नागरिकता का पैमाना तय किया है वो असली में नागरिकता कानून को ही पीछे के दरवाजे से अमल कर रहे है।
छत्तीसगढ़ के कितने आदिवासी,दलितों के माता-पिता के पास जन्म प्रमाणपत्र है,कितने आदिवासी परिवारों के पास जमीन के पुराना कागज है?नागरिकता कानून के मुताबिक जिनका 1 जुलाई 2004 के बाद जन्म हुआ है उन्हें अपने माता पिता दोनों का जन्म प्रमाणपत्र दिखाना होगा तभी उन्हें देश के नागरिक माना जाएगा।
और जिनका जन्म 1 जुलाई 1987 के बाद और 31 दिसंबर 2003 के बीच हुआ है उन्हें माता या पिता में से किसी एक जन का जन्म प्रमाणपत्र दिखाना होगा।छत्तीसगढ़ में कितने आदिवासी दलित परिवारों के पास जन्म प्रमाणपत्र है?
दूसरी बात यह है अगर पाकिस्तान,बांग्लादेश, अफगानिस्तान से कोई धार्मिक प्रताड़ना से भारत आ जाते है तो मुस्लिमों को छोड़कर उन्हें भारत की नागरिकता मिलेगी।अब आदिवासी हिन्दू है नहीं दूसरी बात उनके पास बांग्लादेश, अफगानिस्तान,पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना से पलायन करने का भी कोई दस्तावेज नहीं है? फिर जो आदिवासी लोग भाजपा के बांग्लाभाषियों को अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों का समर्थन कर रहे है भविष्य में वो आदिवासी समुदाय को ही घुसपैठियों होना साबित किया जायेगा।