नरेश सोनी
इंडियन टीवी न्यूज
ब्यूरो चीफ हजारीबाग।
झारखंड में विश्वविद्यालयों के लिए नई व्यवस्था: कुलपति से लेकर शिक्षकों तक की नियुक्ति के नियमों में बड़े बदलाव
हजारीबाग : झारखंड सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब विश्वविद्यालयों के कुलपति (Vice-Chancellor) और अन्य महत्वपूर्ण पदों की नियुक्ति के लिए नए और कड़े नियम लागू किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य योग्य नेतृत्व और कुशल शैक्षणिक व प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करना है।
कुलपति चयन के लिए नई समिति का गठन
कुलपति की नियुक्ति अब एक विशेष चयन समिति द्वारा की जाएगी। इस समिति का अध्यक्ष उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अपर सचिव, प्रधान सचिव या सचिव होंगे। समिति के अन्य सदस्यों में उच्च राष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्राप्त संस्था या विश्वविद्यालय के निदेशक या प्रमुख, यूजीसी का एक प्रतिनिधि और कुलाधिपति द्वारा नामित एक प्रतिनिधि शामिल होंगे। संबंधित विश्वविद्यालय का कुलसचिव भी इस समिति का सदस्य होगा।
चयन प्रक्रिया और कार्यकाल
चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए यह सुनिश्चित किया गया है कि समिति में शामिल कोई भी नामित सदस्य संबंधित विश्वविद्यालय या उसके किसी भी कॉलेज से जुड़ा हुआ न रहा हो। समिति की बैठक में न्यूनतम तीन सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। यह समिति गहन विचार-विमर्श के बाद राज्य सरकार को तीन से पांच योग्य व्यक्तियों के नामों की अनुशंसा करेगी, जिसमें प्रत्येक उम्मीदवार की योग्यता का विस्तृत विवरण दिया जाएगा।
चयनित कुलपति का कार्यकाल संतोषजनक प्रदर्शन पर निर्भर करेगा और उनकी अधिकतम उम्र सीमा 70 वर्ष निर्धारित की गई है।
विश्वविद्यालय सेवा आयोग की स्थापना
विभिन्न शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती के लिए अब विश्वविद्यालय सेवा आयोग का गठन किया जाएगा। इस आयोग में एक अध्यक्ष, एक सदस्य (प्रशासन) और तीन अन्य सदस्य होंगे, जिनकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। यह आयोग विश्वविद्यालयों के अधिकारियों, अध्यापकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों और प्रधानाचार्यों की नियुक्ति के लिए दिशा-निर्देश तैयार करेगा।
प्रत्येक विश्वविद्यालय को हर साल जनवरी तक, सरकार द्वारा अनुमोदित रिक्त पदों का विवरण इस आयोग को भेजना होगा ताकि समय पर नियुक्तियां की जा सकें।
शिकायत निवारण और नए बोर्डों का गठन
छात्रों और कर्मचारियों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए भी नई व्यवस्था की गई है। इसके तहत, विश्वविद्यालयों में छात्र शिकायत निवारण समिति और कर्मचारी शिकायत निवारण समिति का गठन होगा। कर्मचारियों की शिकायतों के लिए एक शिकायत निवारण न्यायाधिकरण भी होगा, जिसके अध्यक्ष उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जज होंगे।
इसके अलावा, विश्वविद्यालयों में विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए कई नए बोर्ड भी बनाए जाएंगे, जैसे अनुसंधान, नवाचार एवं संवर्धन बोर्ड, उद्योग संपर्क एवं उद्यमिता बोर्ड, सूचना प्रौद्योगिकी बोर्ड और छात्र मामलों के बोर्ड।झारखंड में विश्वविद्यालयों के लिए नई व्यवस्था: कुलपति से लेकर शिक्षकों तक की नियुक्ति के नियमों में बड़े बदलाव
रांची। झारखंड सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब विश्वविद्यालयों के कुलपति (Vice-Chancellor) और अन्य महत्वपूर्ण पदों की नियुक्ति के लिए नए और कड़े नियम लागू किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य योग्य नेतृत्व और कुशल शैक्षणिक व प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करना है।
कुलपति चयन के लिए नई समिति का गठन
कुलपति की नियुक्ति अब एक विशेष चयन समिति द्वारा की जाएगी। इस समिति का अध्यक्ष उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अपर सचिव, प्रधान सचिव या सचिव होंगे। समिति के अन्य सदस्यों में उच्च राष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्राप्त संस्था या विश्वविद्यालय के निदेशक या प्रमुख, यूजीसी का एक प्रतिनिधि और कुलाधिपति द्वारा नामित एक प्रतिनिधि शामिल होंगे। संबंधित विश्वविद्यालय का कुलसचिव भी इस समिति का सदस्य होगा।
चयन प्रक्रिया और कार्यकाल
चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए यह सुनिश्चित किया गया है कि समिति में शामिल कोई भी नामित सदस्य संबंधित विश्वविद्यालय या उसके किसी भी कॉलेज से जुड़ा हुआ न रहा हो। समिति की बैठक में न्यूनतम तीन सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। यह समिति गहन विचार-विमर्श के बाद राज्य सरकार को तीन से पांच योग्य व्यक्तियों के नामों की अनुशंसा करेगी, जिसमें प्रत्येक उम्मीदवार की योग्यता का विस्तृत विवरण दिया जाएगा।
चयनित कुलपति का कार्यकाल संतोषजनक प्रदर्शन पर निर्भर करेगा और उनकी अधिकतम उम्र सीमा 70 वर्ष निर्धारित की गई है।विश्वविद्यालय सेवा आयोग की स्थापना
विभिन्न शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती के लिए अब विश्वविद्यालय सेवा आयोग का गठन किया जाएगा। इस आयोग में एक अध्यक्ष, एक सदस्य (प्रशासन) और तीन अन्य सदस्य होंगे, जिनकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। यह आयोग विश्वविद्यालयों के अधिकारियों, अध्यापकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों और प्रधानाचार्यों की नियुक्ति के लिए दिशा-निर्देश तैयार करेगा।
प्रत्येक विश्वविद्यालय को हर साल जनवरी तक, सरकार द्वारा अनुमोदित रिक्त पदों का विवरण इस आयोग को भेजना होगा ताकि समय पर नियुक्तियां की जा सकें।
शिकायत निवारण और नए बोर्डों का गठन
छात्रों और कर्मचारियों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए भी नई व्यवस्था की गई है। इसके तहत, विश्वविद्यालयों में छात्र शिकायत निवारण समिति और कर्मचारी शिकायत निवारण समिति का गठन होगा। कर्मचारियों की शिकायतों के लिए एक शिकायत निवारण न्यायाधिकरण भी होगा, जिसके अध्यक्ष उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जज होंगे।
इसके अलावा, विश्वविद्यालयों में विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए कई नए बोर्ड भी बनाए जाएंगे, जैसे अनुसंधान, नवाचार एवं संवर्धन बोर्ड, उद्योग संपर्क एवं उद्यमिता बोर्ड, सूचना प्रौद्योगिकी बोर्ड और छात्र मामलों के बोर्ड।
ये सभी बदलाव झारखंड के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक नई और पारदर्शी कार्यप्रणाली की नींव रखेंगे, जिससे विश्वविद्यालयों का विकास सुनिश्चित हो सकेगा।
ये सभी बदलाव झारखंड के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक नई और पारदर्शी कार्यप्रणाली की नींव रखेंगे, जिससे विश्वविद्यालयों का विकास सुनिश्चित हो सकेगा।