तिरोडा : महाराष्ट्र से बड़ी खबर
“रेती घाट से अनियमित टिप्पर परिवहन – ग्रामीणों का जीवन संकट में”
“अर्जुनी-बोंडरानी में रेती घाट का लिलाव बना खतरा, सड़कों पर टिप्परों का कब्ज़ा”
“स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा दांव पर – रेती परिवहन पर उठे सवाल”
“शासन और ठेकेदार की लापरवाही – टिप्परों के आतंक से जनजीवन अस्त-व्यस्त”
रेती घाट से हो रहे अनियमित परिवहन से जनजीवन संकट में!
तह. तिरोडा, जि. गोंदिया, ग्राम अर्जुनी-बोंडरानी में शासन की ओर से रेती घाट का लिलाव हुआ है। यहाँ पर शासन की ओर से डेपो में रेत जमा करने का कार्य प्राइवेट ठेकेदार के माध्यम से किया गया है।
इसी डेपो से दिन-रात 24 घंटे टिप्पर द्वारा 250 से 300 टिप्पर रेत जाना शुरू है। इसी हालात में सावरा–पिपरिया स्कूल में पढ़ाई करने वाले बच्चों का आवागमन चालू रहता है और परिसर के लोगों का भी आना-जाना लगातार बना हुआ है।
इसी डेपो के पास रास्ते पर टिप्परों की कतार लगी रहती है, जिससे आवागमन करने वालों को अपनी जान जोखिम में डालकर चलना पड़ रहा है। इसी प्रकार, इसी डेपो में रेत भरने आने वाले टिप्पर तिरोडा–खैरलांजी रोड पर अर्जुनी हाईवे से तिरोडा जाने वाले रोड पर 1 किलोमीटर तक 100 से 150 टिप्पर खड़े रहते हैं।
यहाँ से अर्जुनी, सावरा, पिपरिया, बोंडरानी, मध्यप्रदेश और तिरोडा की ओर आवागमन करने वालों को अपनी जान हथेली पर रखकर सफर करना पड़ रहा है। शासनकर्ता और अधिकारियों की ओर से अनदेखी की जा रही है। ऐसे में अगर कोई बड़ी घटना घटी तो इसका जवाबदार कौन होगा – यह सवाल जनता में उठ रहा है।
अर्जुनी, सावरा, पिपरिया रास्ते पर भारी वाहनों से बड़े-बड़े गड्ढे भी हो चुके हैं। यदि इस समस्या का जल्द निराकरण नहीं हुआ तो इस परिसर के लोगों के पास चक्का जाम और हड़ताल करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा गोंदिया जिल्हा रिपोर्टर
महेंद्र कनोजे की रिपोट