रिपोर्ट नरेन सिरवी
कुक्षी ने 2003 की याद करवा दी ताजा अम्बेडकर चौराहे से कापसी की और जाने वाले मार्ग की दशा ऐसी हो गईं हैं मानो किसी जानवर को सड़न लग गईं हो। इलाज ही नहीं हो रहा हैं, निकलना दुश्वार हो गया हैं इस मार्ग से बड़े बड़े वाहन निकलते हैं जिसने सवारियों से भरी बसे, स्कूलों के नन्हें मुन्हे बच्चो के वाहन भी शामिल हैं. जवाबदार क्यों मौन हैं बाहर से आने वाले राहगीरों का कहना हैं की एक बार कुक्षी आओ लेकिन ऐसी सड़को की हालत देख लगता हैं अब कुक्षी नहीं आना चाहिए करीब 100 KM के दायरे मे व्यापार के मामले मे एक कुक्षी ही सबसे बड़ा हब हैं। उसके बाद भी कुक्षी की दुर्दशा आज भी ऐसी हैं जैसे 2003 का दौर था और उस समय कुक्षी के हालात थे क्षेत्र के जवाबदारों से विनम्र आग्रह हैं की इस और ध्यान दे, इस मार्ग पर जो बसे निकलती हैं उन बसों मे किसी के घर का पिता बैठता हैं, किसी के घर का चिराग बैठता हैं और किसी का पुरा परिवार वाहनो मे बैठकर निकलता हैं।पर बड़ी घटना का इंतजार कर रहे शायद पता नहीं कब होगा कुक्षी no 1