आधा सैंकड़ा से अधिक कॉलोनी काट चुके हैं भू माफिया
करैरा:- करैरा शहर, शिवपुरी जिले का यह व्यापारिक केंद्र, आज भू-माफियाओं के अवैध कॉलोनियों के चंगुल में फंस चुका है। मुख्य रूप से फोकस अवैध कॉलोनियों पर है, जहां बिना किसी डायवर्शन के कृषि भूमि को प्लॉटों में तब्दील कर बेचा जा रहा है। ये माफिया कृषि भूमि के नाम से सस्ती जमीनें खरीदते हैं, फिर बिना व्यावसायिक डायवर्शन के ही नालियां खोदकर, कच्ची सड़कें बनाकर और छोटे प्लॉटों में बांटकर बाजार में उतार देते हैं। यह प्रक्रिया पूर्णतः अवैध है, क्योंकि कृषि भूमि को आवासीय या व्यावसायिक उपयोग में बदलने के लिए डायवर्शन अनिवार्य है, लेकिन यहां कोई नियम नहीं माना जा रहा। टीला रोड, भितरवार रोड, शिवपुरी-झांसी हाईवे के किनारे, मंडी क्षेत्र, चिनौद-श्योपुरा मार्ग और मछावली रोड पर कोर्ट के आसपास दर्जनों ऐसी कॉलोनियां कट रही हैं। करैरा में नक्शा और डायवर्शन पास कराए बिना प्लॉट बेचे जा रहे हैं, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
कृषि भूमि का बिना कॉमर्शियल डायवर्शन प्लॉट बेचकर लाखों ठग रहे, भू माफिया
भू-माफियाओं की यह चालाकी कृषि भूमि को निशाना बनाती है—वे किसानों से कृषि उपयोग के नाम पर जमीन खरीदते हैं, फिर बिना कॉमर्शियल डायवर्शन के ही इसे आवासीय प्लॉटों में बदल देते हैं। यह कैसे संभव है? फर्जी नामांतरण और पटवारियों की मिलीभगत से! कृषि भूमि पर व्यावसायिक उपयोग बिना डायवर्शन के अवैध है, लेकिन यहां कोई रुकावट नहीं। प्लॉट खरीदारों को कोई सुविधा नहीं मिलती—न सड़क, न नल से पानी, न बिजली कनेक्शन। नगर परिषद को कोई टैक्स नहीं दिया जाता, और विधिवत अनुमति जैसे रेरा रजिस्ट्रेशन का तो सवाल ही नहीं। अप्रैल 2025 में एमपी सरकार ने अवैध कॉलोनियों पर सख्त नियमों की घोषणा की, लेकिन करैरा में यह खेल जारी है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि स्थानीय पटवारी से लेकर पुराने पटवारी आर आई रिश्वत लेकर दस्तावेजों में हेराफेरी करते हैं, जिससे माफिया बेलगाम हैं। प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है ।करैरा की जनता को उम्मीद है नये एसडीएम इन माफियाओ पर लगाम लगायेंगे।
सुविधाहीन अवैध कॉलोनियां: न टैक्स, न रेरा परमिशन—खरीदारों को ठगकर माफिया मुनाफा कमा रहे। इन अवैध कॉलोनियों में खरीदारों को सिर्फ धोखा मिलता है—बिना सड़क के कीचड़ भरे रास्ते, बिना नल के पानी की किल्लत, बिना बिजली के अंधेरा। माफिया कोई सुविधा नहीं देते, क्योंकि ये कॉलोनियां बिना डायवर्शन के कटी हैं। नगर परिषद को विकास शुल्क या टैक्स का एक पैसा नहीं जाता, जिससे शहर का विकास ठप है। रेरा जैसी विधिवत अनुमति न होने से खरीदारों का कोई कानूनी संरक्षण नहीं, और विवाद में वे ठगे जाते हैं। मार्च 2025 में एमपी सरकार ने अवैध कॉलोनियों पर 10 साल जेल का कानून प्रस्तावित किया, लेकिन करैरा में दर्जनों कॉलोनियां अभी भी फल-फूल रही हैं। स्थानीय पटवारियों और पुराने कर्मचारियों की मिलीभगत से यह साजिश चल रही है, जहां फर्जी डायवर्शन सर्टिफिकेट जारी होते हैं। जनता जांच की मांग कर रही है, क्योंकि प्रशासन की निष्क्रियता से भू माफिया मजबूत हो रहे हैं।
नये एसडीएम से भू माफियाओं पर लगाम की उम्मीद
करैरा आज भू माफियाओं की जकड़ में है यहाँ चारो और कॉलोनिया काटी जा रही है आधा सैंकड़ा से अधिक कॉलोनी कट चुकी है एक दर्जन कॉलोनी अभी प्रस्तावित है जहाँ कॉलोनी माफिया काट रहे है वर्षों से जमे अधिकारियों ने आज तक ध्यान नहीं दिया अब लोगो को उम्मीद नये एसडीएम अनुराग निंगवाल से है कि आखिर जो कार्य यहाँ माफियाओ पर लगाम लगाने के लिये आज तक नही हुए वह अब किये जाये कलेक्टर महोदय के आदेशानुसार अनुभाग करैरा अंतर्गत ग्रामीण और नगरीय निकायों में स्वयं निरीक्षण किया जा रहा है। । कृषि भिन्न प्रयोजन के लिए नियमविरुद्ध उपयोग की जा रही भूमियों के भूमि स्वामियों को नोटिस जारी कर नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जाएगी।
अनुराग निंगवाल एसडीएम करैरा करेरा से कमलेश तिवारी की रिपोर्ट