क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र मशोबरा की कीट वैज्ञानिक डॉ. संगीता शर्मा ने सेब में माईट के प्रकार, बढ़ौतरी के कारण, निवारण और प्रबंधन विषय पर पूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि माईट को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
कार्यशाला में नौणी विश्वविद्यालय की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शालिनी वर्मा, डॉ. नीलम कुमारी, क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र रोहडू की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. ऊषा शर्मा, बी.टी.एम. कटराईं, कुल्लू की नीजू राणा ने सारगर्भित जानकारी प्रदान की। प्रदेश के विभिन्न भागों से आए प्रगतिशील बागवानों ने विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यशाला में वैज्ञानिकों एवं बागवानों ने स्पष्ट किया कि स्वस्थ मृदा ही स्वस्थ पौधा प्रदान कर सकती है और इन्हीं के माध्यम से बेहतर फसल प्राप्त की जा सकती है।
डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी की अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य, निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. इन्द्र देव सहित विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, प्राध्यापक एवं प्रदेश के विभिन्न ज़िलों के आए प्रगतिशील बागवान तथा विभिन्न बागवानी सहकारी समिति