जयपुर से ब्रजेश पाठक की रिर्पोट
राजधानी जयपुर में दी एजूकेशन कमेटी ऑफ द माहेश्वरी समाज के पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से केंद्रीय बजट 2026 पर अपनी प्रतिक्रिया देते बजट को देश हित में सर्वोपरि बताया। अध्यक्ष उमेश सोनी ने कहा कि आम आदमी के नजरिए से बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि घर की रसोई और जेब के संतुलन की बात होती है। जब भी बजट आता है, एक सामान्य परिवार की नजरें मुख्य रूप से तीन-चार चीजों पर टिकी होती हैं जिसकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने पूर्ण रूप से इस सभी चीजों का ध्यान रहते हुए बजट जारी किया है और आम आदमी को राहत प्रदान की है।
इनकम टैक्स (आयकर) में राहत: मिडिल क्लास की सबसे बड़ी उम्मीद यही होती है कि टैक्स स्लैब में बदलाव हो ताकि हाथ में थोड़ा ज्यादा पैसा बचे। पुरानी टैक्स व्यवस्था बनाम नई टैक्स व्यवस्था की उलझन अक्सर चर्चा का विषय रहती है।
रसोई का बजट और महंगाई: आम आदमी के लिए बजट का मतलब सीधा दाल, तेल, चीनी और गैस सिलेंडर की कीमतों से होता है। अगर रोजमर्रा की चीजों पर ड्यूटी घटती है, तो सुकून मिलता है।
शिक्षा और स्वास्थ्य: एक औसत परिवार की कमाई का बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई और अस्पताल के बिलों में जाता है। बजट में इन क्षेत्रों के लिए आवंटन और सरकारी योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत) का विस्तार सीधे तौर पर राहत पहुँचाता है।
घर और लोन की ईएमआई (EMI): होम लोन पर मिलने वाली छूट या ब्याज दरों को लेकर सरकार के फैसले यह तय करते हैं कि एक आम आदमी का ‘अपना घर’ का सपना कब और कैसे पूरा होगा।
निष्कर्ष आम आदमी के लिए एक ‘अच्छा बजट’ वही है जो बचत को बढ़ावा दे। जरूरी चीजों की कीमतें काबू में रखे।
रोजगार के नए अवसर पैदा करे। “बजट वह कोशिश है जिसमें सरकार यह तय करती है कि आपकी जेब से कितना पैसा निकाला जाए और आपका दिल यह उम्मीद करता है कि उसे कुछ वापस मिल जाए।”