पुलिस मुठभेड़ों में वृद्धि हुई है, और सरकार मुठभेड़ों को गौरव का प्रतीक बता रही है!लेकिन अपराधी भी समय समय पर अपराध को अंजाम देकर सवालियां निसान लगा ही देते है!सरकार लगातार दावे करती रही है कि राज्य में कानून व्यवस्था नियंत्रण में है। मगर पिछले कुछ समय से लगातार अपराध, लूटपाट और हत्या के बढ़ते मामलों ने दावों की कलई खोल दी है। अपराधी बेशक बाद में पकड़ लिए जाते हों, लेकिन सच है कि वे वारदात को अंजाम देने से नहीं चूक रहे। सवाल है उनके भीतर पुलिस का खौफ क्यों नहीं दिखता!पिछले दिनों जौनपुर में बस के चालक ललई यादव की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई! मुख्य आरोपी ने सरेआम सड़क पर उनकी गर्दन पर पैर रखकर दबा दिया!इसी तरह बुलंदशहर में एक छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई!आजमगढ़ में दुष्कर्म पीड़िता की हत्या कर दी गई!मुज़फ्फरनगर में भी मासुम बच्चों के साथ अपराधीयों में दुष्कर्म की घटनाओं को अंजाम दिया गया वह अलग बात हैं कि पुलिस ने मुठभेड़ के बाद अपराधीयों को गिरफ्तार किया,यही नही संभल में कुछ लोग एक युवक को घर से खींच कर ले गए और उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। इस घटना को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि बदायूं में गुरुवार को हिंदुस्तान पेट्रोलियम के इथेनाल संयंत्र के दफ्तर में घुस कर दो वरिष्ठ अधिकारियों की गोली मार कर हत्या कर दी गई!बताया जा रहा है कि काली सूची में डाले गए एक विक्रेता ने इस वारदात को अंजाम दिया!आरोपी पहले भी महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी की कार पर हमला कर चुका था। जब इस मामले की पुलिस और जिला प्रशासन स्तर पर शिकायत दर्ज करा दी गई थी, तो आरोपी पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? सवाल यह भी है कि उच्च सुरक्षा वाले संयंत्र में हथियार लेकर वह कैसे घुसा ? कानून व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों के पास इसका क्या जवाब है?कुछ घटनाओ कप देखा जाये तो अपराधियों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है! आए दिन हो रहीं हत्या या अन्य घटनाओं से समझा जा सकता है कि राज्य में अपराध पर लगाम लगने के दावे में दम नहीं है!जमीनी सच्चाई यही है कि अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं!पुलिस की तमाम कथित सख्ती और सक्रियता के बावजूद आपराधिक मानसिकता के लोगों में कानून और सजा का कोई डर नहीं है। ऐसा लगता है कि अपराध नियंत्रण में कहीं न कहीं कमजोर कड़ी रह गई है, जिसकी शिनाख्त नहीं की जा रही है!आज स्थिति यह है कि लोग खुद को घरों से लेकर दफ्तरों तक सुरक्षित नहीं पा रहे हैं! आए दिन जघन्य अपराधों के मद्देनजर उनकी चिंताएं नाहक नहीं हैं!सवाल है कि सरकार अपराध और अपराधियों पर काबू करने के जो दावे करती रही है, हकीकत उसके उलट क्यों दिख रही है।
रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़