उरई(जालौन):
कांशीराम कॉलोनी में रहने वाली असहाय वृद्धा मुला देवी के लिए जिला प्रशासन किसी परिवार से कम नहीं है। पति के निधन के बाद पूरी तरह अकेली पड़ चुकी मुला देवी का सहारा पिछले दो साल से जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय बने हुए हैं। वर्ष 2024 में जनसुनवाई के दौरान मुला देवी बिना किसी कागज के कलेक्ट्रेट पहुंच गई थीं। उन्होंने टूटी जाली, खराब दरवाजों और खाने की समस्या को लेकर अपनी व्यथा सुनाई। उनकी हालत देख जिलाधिकारी ने तत्काल टीम भेजकर आवास की मरम्मत कराई और जरूरी इंतजाम सुनिश्चित किए। कुछ समय बाद जब मुला देवी दोबारा कलेक्ट्रेट पहुंचीं, तब भी उन्हें यह नहीं पता था कि उनकी मदद करने वाला व्यक्ति जिले का डीएम है। उनकी सादगी और असहाय स्थिति को देखते हुए डीएम राजेश कुमार पाण्डेय ने खुद उनके घर जाने का निर्णय लिया। होली के दौरान जब वे उनके घर पहुंचे, तो हालात देखकर उन्होंने ठान लिया कि जब तक जिले में रहेंगे, मुला देवी की मदद करते रहेंगे। तभी से यह सिलसिला लगातार जारी है। मुला देवी अक्सर कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी जरूरतों की सूची देती हैं। प्रशासन की ओर से उनकी सूची के अनुसार राशन और अन्य जरूरी सामान की किट बनाकर उनके घर पहुंचा दी जाती है। बृहस्पतिवार को भी मुला देवी कलेक्ट्रेट पहुंचीं और बुंदेली भाषा में बोलीं—“लला, राशन खत्म हो गओ… भिजवाय देओ।” उनकी बात सुनते ही डीएम ने तुरंत अधिकारियों को निर्देश देकर राशन भिजवाने की व्यवस्था कराई। जब मुला देवी से पूछा गया कि उन्हें पता है कौन उनकी मदद करता है, तो उन्होंने मासूमियत से जवाब दिया—”कलेक्ट्रेट में रहने वाले लला हर महीना सामान भिजवा देत हैं।” मुला देवी की यह कहानी न सिर्फ प्रशासनिक संवेदनशीलता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि एक जिम्मेदार अधिकारी किसी असहाय के लिए परिवार बन सकता है।
(अनिल कुमार ओझा ब्यूरो प्रमुख उरई-जालौन) उत्तर प्रदेश