राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
कटनी। गिरफ्तारी प्रक्रिया को पारदर्शी और कानूनी दायरे में लाने के लिए पुलिस मुख्यालय भोपाल ने बड़ा कदम उठाया है। माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के पालन में सभी पुलिस इकाइयों को सख्त परिपत्र जारी किया गया है, जिसमें गिरफ्तारी के दौरान स्पष्ट और लिखित कारण देना अनिवार्य कर दिया गया है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा 6 नवंबर 2025 को दिए गए आदेश में यह साफ कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के कारण जानने का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत एक मौलिक अधिकार है। इसी के मद्देनज़र अब पुलिस को केवल मौखिक नहीं, बल्कि लिखित रूप में गिरफ्तारी के ठोस कारण देने होंगे।
जारी निर्देशों के अनुसार, गिरफ्तारी के कारण ऐसी भाषा में लिखे जाएंगे जिसे संबंधित व्यक्ति आसानी से समझ सके। साथ ही यह जानकारी गिरफ्तारी के समय या फिर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी से कम से कम दो घंटे पहले देना अनिवार्य होगा।
इतना ही नहीं, इस पूरी प्रक्रिया का उल्लेख गिरफ्तारी पंचनामा और संबंधित दस्तावेजों में दर्ज करना भी जरूरी होगा। इस संबंध में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 47 का भी पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि यदि इन नियमों का पालन नहीं किया गया, तो गिरफ्तारी को अवैध माना जा सकता है। साथ ही संबंधित अधिकारी के खिलाफ न्यायालय की अवमानना या विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है, और आरोपी को तत्काल रिहाई का अधिकार मिल सकता है।
पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस अधीक्षकों और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें, ताकि कानून के साथ-साथ नागरिकों के अधिकारों की भी पूरी सुरक्षा हो सके।