राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
कटनी। शहर के साहित्यिक परिवेश को नई ऊर्जा देने वाला एक यादगार आयोजन उस समय देखने को मिला, जब वरिष्ठ पत्रकार एवं जनकवि सुरेश सोनी ‘ऋतुराज’ के प्रथम काव्य संग्रह “अनुभूति” का भव्य विमोचन होटल अरिंदम सभागार में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, समाज और प्रशासन से जुड़े गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति ने इसे ऐतिहासिक बना दिया।
मुख्य अतिथि प्रो. राजेश वर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि “अगर व्यक्ति में जज्बा हो तो वह किसी भी उम्र में अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। ध्येय के प्रति समर्पण ही सफलता की कुंजी है।” उन्होंने 80 वर्ष की आयु में भी सक्रिय साहित्य सृजन को प्रेरणादायक बताया और काव्य संग्रह को “राम नाम की माला के 108 मोतियों” से तुलना की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संदीप जायसवाल ने की। उन्होंने कहा कि “कवि समाज की आवाज होता है, जो व्यंग्य और वेदना के माध्यम से जनभावनाओं को अभिव्यक्त करता है।” साथ ही उन्होंने आलोचना को लोकतंत्र का जरूरी हिस्सा बताते हुए नेताओं को इसे स्वीकार करने की सीख दी।
विशिष्ट अतिथि आशीष शुक्ला ने भावुक होते हुए कहा कि यह क्षण केवल एक पुस्तक विमोचन नहीं, बल्कि एक पुत्र द्वारा अपने पिता के सपनों को साकार करने का गौरवपूर्ण अवसर है। उन्होंने परिवार के सहयोग को भी सफलता का आधार बताया।
कार्यक्रम में रामजी श्रीवास्तव, अशोक विश्वकर्मा, मनोहर मनोज और डॉ. प्रगति सेठ सहित कई गणमान्य अतिथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
साहित्य में समाज की झलक
काव्य संग्रह “अनुभूति” की समीक्षा करते हुए डॉ. चित्रा प्रभात ने कहा कि इसमें समाज के अंतिम व्यक्ति की पीड़ा को प्रभावी ढंग से उकेरा गया है। वहीं वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र सिंह ठाकुर ने कवि की 5 दशकों की साहित्यिक यात्रा को संघर्ष और प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।
काव्य संध्या ने बांधा समा
कार्यक्रम के दूसरे चरण में आयोजित कवि सम्मेलन में वैभव अवस्थी और दावर रजा ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संचालन युवा रचनाकार तुषार तपन ने किया, जिसने पूरे माहौल को काव्यमय बनाए रखा।
सम्मान और सराहना का दौर
समारोह में अतिथियों का शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह से सम्मान किया गया। विभिन्न सामाजिक एवं साहित्यिक संस्थाओं ने भी पुष्पहारों से जनकवि सुरेश सोनी ‘ऋतुराज’ का अभिनंदन किया।
विशेष पल भी रहे यादगार
कार्यक्रम के दौरान विधायक संदीप जायसवाल का जन्मदिन भी केक काटकर मनाया गया, जिसने आयोजन में एक आत्मीयता का रंग जोड़ दिया।
कवि की भावुक अभिव्यक्ति
अंत में जनकवि सुरेश सोनी ‘ऋतुराज’ ने अपनी चर्चित पंक्तियां—
“मिटी हाथ से यश की रेखा… हमारे हिस्से आई आग…”
प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।
कुल मिलाकर, “अनुभूति” का यह विमोचन समारोह न केवल एक पुस्तक का लोकार्पण था, बल्कि साहित्य, संवेदना और संस्कारों का संगम बनकर शहर की सांस्कृतिक स्मृतियों में दर्ज हो गया।