राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
कटनी:बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई ही नहीं, बल्कि एक दंडनीय अपराध भी है। कम उम्र में बच्चों का विवाह करना कानून का खुला उल्लंघन है, जिस पर सख्त सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में आज भी यह कुप्रथा जारी है, जो बच्चों के भविष्य पर गहरा असर डाल रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाल विवाह से बच्चों की शिक्षा बीच में ही रुक जाती है, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। कम उम्र में विवाह के कारण मानसिक तनाव बढ़ता है और वे जिम्मेदारियों के बोझ तले दब जाते हैं। खासकर बालिकाओं के स्वास्थ्य पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है, जिससे कुपोषण, मातृत्व से जुड़ी जटिलताएं और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
सामाजिक दृष्टिकोण से भी बाल विवाह बच्चों के समग्र विकास में बाधा बनता है। उनका बचपन छिन जाता है और वे जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों से वंचित रह जाते हैं।
प्रशासन लगातार लोगों को जागरूक करने और इस कुप्रथा पर रोक लगाने के लिए अभियान चला रहा है। आमजन से अपील की जा रही है कि बाल विवाह की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
बाल विवाह को रोकना केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि समाज के उज्जवल भविष्य की जिम्मेदारी भी है।