राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
कटनी — जिले में बाल विवाह के खिलाफ प्रशासन की सख्त निगरानी एक बार फिर प्रभावी साबित हुई। शहर के माधवनगर क्षेत्र में सोमवार को होने जा रहे एक बाल विवाह को जिला प्रशासन की मुस्तैदी से समय रहते रुकवा दिया गया। साथ ही मामले को गंभीरता से लेते हुए सीजीएम न्यायालय ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत इंजंक्शन (व्यादेश) आदेश भी जारी किया।
चाइल्ड हेल्पलाइन की सूचना पर सक्रिय हुई टीम
मामले की जानकारी महिला एवं बाल विकास विभाग को चाइल्ड हेल्पलाइन के जरिए मिली थी। सूचना मिलते ही विभाग और राजस्व की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। दस्तावेजों की जांच में स्पष्ट हुआ कि बालिका की उम्र 18 वर्ष से कम है, जो कानूनन विवाह के लिए निर्धारित आयु से कम है।
परिजनों को समझाइश, मौके पर बना पंचनामा
अधिकारियों ने परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए समझाइश दी कि नाबालिग का विवाह करना दंडनीय अपराध है। टीम द्वारा मौके पर पंचनामा भी तैयार किया गया। प्रशासन की समझाइश के बाद परिजन सहमत हुए और बालिका का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले नहीं करने का आश्वासन दिया।
कोर्ट ने भी दिखाई सख्ती, जारी हुआ व्यादेश
मामले को कानूनी रूप देते हुए प्रभारी परियोजना अधिकारी एवं पदेन बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी द्वारा सीजीएम न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया। जिस पर न्यायालय ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बाल विवाह रोकने के लिए इंजंक्शन आदेश जारी कर दिया।
संयुक्त टीम ने निभाई अहम भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में महिला एवं बाल विकास एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई, जिसमें सहायक संचालक वनश्री कुर्वेती, तहसीलदार आकाश नीरज, बाल संरक्षण अधिकारी मनीष तिवारी, वन स्टॉप सेंटर प्रभारी शैली तिवारी, परियोजना अधिकारी प्रीती उपाध्याय एवं बाल कल्याण समिति के सदस्य दुर्गेश शामिल रहे।
बाल विवाह पर प्रशासन सख्त
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर रोक लगाने के लिए लगातार निगरानी और कार्रवाई जारी रहेगी। नागरिकों से भी अपील की गई है कि ऐसी किसी भी जानकारी की तुरंत सूचना संबंधित विभाग या चाइल्ड हेल्पलाइन को दें।