अकरम खान पटेल की रिपोर्ट
बैतूल। भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र के भीमपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बासींदा के मोहदा बर्राढाना में 2 मई 2026 को हुई भीषण आगजनी ने पूरे गांव को तबाही के मंजर में बदल दिया।
आग इतनी विकराल थी कि देखते ही देखते 25 मकान जलकर पूरी तरह राख हो गए।
हालात यह रहे कि प्रभावित परिवारों के पास तन पर पहने कपड़ों के अलावा कुछ भी नहीं बचा। घर-गृहस्थी का सारा सामान आग की भेंट चढ़ गया, जिससे पीड़ित खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर हो गए हैं।
*घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधि*
घटना की जानकारी मिलते ही कांग्रेस जिला अध्यक्ष निलय विनोद डागा तत्काल मौके पर पहुंचे। उनके साथ पूर्व विधायक धरमूसिंह सिरसाम एवं आदिवासी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम भी मौजूद रहे।
नेताओं ने मौके का निरीक्षण कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उनका दुख साझा किया।
तत्काल राहत: राशन सामग्री का वितरण
कांग्रेस परिवार की ओर से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत के रूप में राशन सामग्री के पैकेट वितरित किए गए, ताकि शुरुआती स्तर पर उन्हें भोजन की परेशानी का सामना न करना पड़े।
प्रशासन से की तत्काल मदद की मांग
निलय विनोद डागा ने मौके से ही प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा करते हुए—
फायर ब्रिगेड की तत्काल उपलब्धता पानी के टैंकरों की व्यवस्था पीड़ितों के लिए भोजन, राशन, दवाइयां और कपड़ों की आपूर्ति की मांग की।
उन्होंने भैंसदेही के एसडीएम, डिप्टी कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक से भी संपर्क कर राहत कार्यों में तेजी लाने का आग्रह किया।
ग्रामीणों ने मिलकर बुझाई आग, लेकिन नुकसान भारी
घटना के दौरान ग्रामीणों एवं प्रशासन ने मिलकर आग पर काबू पाने के प्रयास किए, लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि तब तक भारी नुकसान हो चुका था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होते, तो नुकसान को कम किया जा सकता था।
“कांग्रेस हर पीड़ित परिवार के साथ”
निलय विनोद डागा ने पीड़ित परिवारों को भरोसा दिलाया कि—
इस कठिन समय में कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है
हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी
साथ ही उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा एवं पुनर्वास सहायता प्रदान की जाए, ताकि वे दोबारा अपना जीवन शुरू कर सकें।
स्थिति गंभीर, त्वरित राहत और पुनर्वास की आवश्यकता
मोहदा बर्राढाना की यह घटना न सिर्फ एक हादसा है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन पर पड़ा गहरा संकट है, जिसमें तत्काल और व्यापक सहायता की आवश्यकता है।