बरेली के फरीदपुर में कॉलोनाइजर/भू-माफिया के हौसले सातवें आसमान पर हैं और प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। कस्बा सराय जैड ए फर्स्ट की गाटा संख्या 495 में स्थित सरकारी गूल पर अवैध कब्जा महीनों से जारी है, लेकिन जिम्मेदार अफसर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ फाइलें घुमा रहे हैं।
DM के आदेश बे असर
मामला तब खुला जब मोहल्ला पर मिश्रान के पीयूष शर्मा आदि ने समाधान दिवस में शिकायत की थी। DM के निर्देश पर हल्का लेखपाल कमल गंगवार ने मौके पर जाकर सीमांकन किया। नगर पालिका कर्मचारी के सामने गूल चिन्हित हुई। कागज पूरे हो गए, लेकिन कार्रवाई शून्य। सवाल उठता है कि जब सब साफ है तो बुलडोजर क्यों खामोश है?
सुविधा शुल्क या साजिश?
आरोप गंभीर हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि सुविधा शुल्क लेकर अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा। नगर पालिका JCB खराब होने का बहाना बनाकर महीनों से टालमटोल कर रही है। इसी ढील का फायदा उठाकर कालोनाइजर/भू माफिया ने सरकारी जमीन को निजी बताकर कब्जा पक्का कर लिया। हद तो तब हो गई जब उसी माफिया ने कुछ दूरी पर दोबारा सरकारी गूल दबाकर अबैध कॉलोनी बसानी शुरू कर दी। यानी प्रशासन की नाक के नीचे साम्राज्य खड़ा हो रहा है।
अफसरों के गोल-मोल जवाब
जब मीडिया ने तहसीलदार प्रशांत अवस्थी से सवाल किया तो उन्होंने मामला नगर पालिका का बता दिया। अधिशासी अधिकारी पुनीत कुमार ने और चौंकाया। उन्होंने किसी “विशेष उद्देश्य” से कृषि विभाग द्वारा कार्रवाई की बात कहकर किनारा कर लिया।
वहीं सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सतीश चंद्र ने साफ किया कि गाटा संख्या 505 गूल है और इसका रख-रखाव नगर पालिका की जिम्मेदारी है। यानी गेंद सीधे EO पुनीत कुमार के पाले में है।
सबसे बड़ा सवाल
जब कार्रवाई नगर पालिका EO को करनी है, तो DM के आदेश की अवहेलना क्यों? कॉलोनाइजर पर कार्रवाई से भागना, और उसे मोहलत देना किस ओर इशारा करता है? क्या ये मिलीभगत नहीं? क्या सरकारी संपत्ति को लुटवाने का ठेका ले लिया गया है?
जनता पूछ रही है
फरीदपुर की जनता जानना चाहती है कि कब तक अवैध कॉलोनाइजर/भू-माफिया सरकारी जमीन निगलता रहेगा, कब तक अफसर बहानेबाजी करेंगे, अगर DM के आदेश का ये हाल है तो आम आदमी की सुनवाई कहां होगी?
अब वक्त आ गया है कि योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस का बुलडोजर फरीदपुर की इस गूल पर भी चले। वरना ये संदेश जाएगा कि फरीदपुर में कानून नहीं, भू-माफिया का राज चलता है।
रिपोर्टर -: प्रमोद शर्मा
जिला-: ब्यूरो बरेली