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हजारीबाग
हजारीबाग: कला, संस्कृति और मानवता के अग्रदूत गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 164वीं जयंती के अवसर पर हजारीबाग में बंगाली समाज ने अपनी समृद्ध विरासत का परिचय दिया। बेंगॉली एसोसिएशन हजारीबाग द्वारा स्थानीय यूनियन क्लब एवं लाइब्रेरी परिसर में आयोजित ‘सांस्कृतिक संध्या’ ने शहर के कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बारिश के बावजूद कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़ ने गुरुदेव के प्रति अगाध श्रद्धा और प्रेम को प्रदर्शित किया।
मंगलाचरण और दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ भारती सान्याल, बिकास चौधरी, रूपा चटर्जी, दिलीप गुप्ता और अरविंद चौधरी ने संयुक्त रूप से ‘मंगल द्वीप’ प्रज्वलित कर और गुरुदेव के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इस मौके पर मनोज सेन ने गुरुदेव के जीवन दर्शन और उनके चिंतन के रोचक पहलुओं को साझा करते हुए बताया कि टैगोर के विचार आज के समय में भी कितने प्रासंगिक हैं।
रवींद्र संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां
सांस्कृतिक शाम की शुरुआत गुरुदेव के जन्मदिवस के प्रसिद्ध गीत ‘हे नूतन…’ के समूह गायन से हुई, जिसे तनुश्री मुखर्जी, मधुच्छंदा मुखर्जी और साथियों ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की कुछ प्रमुख झलकियां इस प्रकार रहीं
नृत्य प्रस्तुति: आद्रिका दास गोस्वामी और मौमिता गांगुली ने अपनी एकल नृत्य-नाटिका से दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
संगीत की लहरें: देबबानी राधा सामंता ने हवाईअन गिटार पर जब मॉनोबाहिनी बिहारिणी की धुन छेड़ी, तो पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा।
समूह प्रदर्शन: सीमा घोष की संस्था संगीतायन’ और रूबी राणा के निर्देशन में सामूहिक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई।
चित्रांकन प्रतियोगिता के विजेता हुए पुरस्कृत
केवल संगीत ही नहीं, बल्कि बच्चों की कला को प्रोत्साहित करने के लिए शनिवार सुबह चित्रांकन प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया था। कार्यक्रम के दौरान इसके विजेताओं को शंकर बनर्जी और सूतनु राय जैसे गणमान्य अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया।
समापन और आभार
कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन मौमिता मल्लिक ने किया। अंत में, टैगोर के प्रिय गीत आगुनेरो पारसमणि के सामूहिक गायन के साथ इस उत्सव का समापन हुआ। बेंगॉली एसोसिएशन के सचिव सोमनाथ कुनार ने अतिथियों का स्वागत किया और अध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा ने धन्यवाद ज्ञापन के जरिए सभी का आभार जताया।