राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
कटनी।
कभी शहर की शान और शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा साधुराम स्कूल आज भी अपनी भव्यता और मजबूत निर्माण की कहानी बयां करता है। एक समय ऐसा था जब शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण अंचलों से भी छात्र यहां पढ़ने आया करते थे। इसी ऐतिहासिक विद्यालय से पढ़कर कई छात्र आगे चलकर नेता, डॉक्टर, अफसर और शिक्षक बने।
वर्षों तक उपेक्षा का शिकार रहने के बाद अब नगर निगम द्वारा स्कूल के रंग-रोगन और सौंदर्यीकरण का कार्य कराया जा रहा है, जिससे स्कूल की पुरानी चमक लौटती दिखाई दे रही है। हालांकि भवन के ऊपर बना पुराना छप्पर आज भी जर्जर हालत में जस का तस बना हुआ है। बरसात के दौरान पानी रिसने से नीचे का हिस्सा खराब होने का खतरा बना हुआ है, वहीं कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
स्कूल परिसर से लगी दूसरी पुरानी बिल्डिंग भी बदहाल स्थिति में है। स्थानीय नागरिक बताते हैं कि यहां कभी लैबोरेट्री संचालित होती थी, लेकिन अब वह भवन भी सुरक्षा और संरक्षण की मांग कर रहा है।
वार्ड के युवा पार्षद अवकाश जायसवाल ने बताया कि साधुराम स्कूल शहर की ऐतिहासिक पहचान रहा है। यह विद्यालय समाजसेवी साधुराम जायसवाल द्वारा शिक्षा के उद्देश्य से दान दी गई भूमि पर बनाया गया था, जिसके कारण इसका नाम साधुराम स्कूल पड़ा। उन्होंने कहा कि कटनी सहित जिले और जिले के बाहर भी अनेक लोग इस स्कूल से शिक्षा प्राप्त कर आज बड़े पदों पर कार्यरत हैं।
पार्षद ने नगर निगम द्वारा किए जा रहे सौंदर्यीकरण कार्य की सराहना करते हुए कहा कि केवल रंग-रोगन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भवन के जर्जर छप्पर और पुरानी संरचनाओं की मरम्मत भी बेहद जरूरी है। प्रशासन को स्कूल की सुरक्षा और संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए स्थायी समाधान की दिशा में कार्य करना चाहिए, ताकि शहर की इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।