नरेश सोनी ब्यूरो हजारीबाग।
हजारीबाग
जिला प्रशासन की एक बेहद संवेदनशील और सराहनीय पहल से जिले के 24 दिव्यांगजनों के जीवन को नई गति और आत्मनिर्भरता मिली है। उपायुक्त (DC) श्री हेमन्त सती के दिशा-निर्देशानुसार शनिवार को समाहरणालय परिसर में समाज कल्याण विभाग की ओर से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उपविकास आयुक्त (DDC) रिया सिंह द्वारा जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) मद से उपलब्ध कराई गई कुल 24 बैटरी चालित ट्राईसाइकिल का वितरण दिव्यांग लाभुकों के बीच किया गया। इस गरिमामयी अवसर पर जिला समाज कल्याण पदाधिकारी शिप्रा सिंह भी मुख्य रूप से मौजूद थीं।
समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा योजनाओं का लाभ: उपायुक्त
योजना की सफलता और इसके उद्देश्य पर बात करते हुए उपायुक्त हेमन्त सती ने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाना हजारीबाग जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन हमारे समाज का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अभिन्न हिस्सा हैं। उन्हें मुख्यधारा में लाने और आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन हरसंभव सहयोग प्रदान करने हेतु पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उपायुक्त ने भरोसा जताया कि इस आधुनिक बैटरी चालित ट्राईसाइकिल से दिव्यांगजनों की दैनिक गतिविधियां न सिर्फ आसान होंगी, बल्कि उनकी शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सहभागिता को एक नई दिशा मिलेगी, जिससे वे पूरे सम्मान के साथ आत्मनिर्भर जीवन की ओर कदम बढ़ा सकेंगे।
यह सिर्फ वाहन नहीं, दिव्यांगों के आत्मविश्वास का माध्यम है: डीडीसी
वितरण कार्यक्रम के दौरान ट्राईसाइकिल की चाबी सौंपते हुए उपविकास आयुक्त रिया सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन दिव्यांगजनों को एक सशक्त और सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के लिए लगातार धरातल पर कार्य कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह बैटरी चालित ट्राईसाइकिल इन दिव्यांगजनों के लिए केवल एक वाहन मात्र नहीं है, बल्कि यह समाज में उनके आत्मविश्वास और गतिशीलता को बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम है। इससे विशेष रूप से पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को नियमित रूप से अपने विद्यालय और कॉलेज आने-जाने में बहुत बड़ी सहूलियत होगी।
चेहरे पर लौटी मुस्कान; दिव्यांग शिक्षक और छात्रों ने जताया आभार
ट्राईसाइकिल प्राप्त करने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों, युवाओं और अन्य लाभुकों के चेहरे पर खुशी और उत्साह की चमक साफ देखी जा सकती थी। कार्यक्रम के दौरान अपनी ट्राईसाइकिल पाकर भावुक हुए एक दिव्यांग शिक्षक ने जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “बैटरी चालित ट्राईसाइकिल मिलने से मेरी जिंदगी की बहुत बड़ी मुश्किल आसान हो गई है। अब मैं बिना किसी शारीरिक बाधा के बिल्कुल सही समय पर अपने विद्यालय पहुंचकर बच्चों को शिक्षा दे सकूँगा।”
सभी लाभार्थियों ने एक सुर में कहा कि जिला प्रशासन की यह जनहितकारी और संवेदनशील पहल उनके दैनिक जीवन के संघर्षों को कम कर एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लेकर आएगी।
शीर्षक: गतिशीलता ही सशक्तीकरण की असली बुनियाद है
हजारीबाग जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफटी (DMFT) फंड का सदुपयोग कर 24 दिव्यांगजनों को बैटरी चालित ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराना सामाजिक न्याय और प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक बेहतरीन उदाहरण है। अक्सर देखा जाता है कि हमारे समाज में दिव्यांगजन केवल शारीरिक अक्षमता के कारण नहीं, बल्कि गतिशीलता (Mobility) के अभाव में शिक्षा और रोजगार के अवसरों से पीछे छूट जाते हैं। जब एक दिव्यांग छात्र या शिक्षक को बिना किसी मानवीय सहारे के खुद से सफर करने की आजादी मिलती है, तो वह केवल एक सड़क पार नहीं करता, बल्कि वह समाज में अपनी आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखता है।
इस योजना की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसमें जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के पैसों का इस्तेमाल किया गया है, जो यह साबित करता है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति सुदृढ़ हो, तो औद्योगिक विकास के फंड का सीधा लाभ समाज के सबसे कमजोर और जरूरतमंद तबके तक पहुंचाया जा सकता है। हालांकि, प्रशासन को इस बेहतरीन पहल के साथ एक और कदम आगे बढ़ाना होगा—वह है हजारीबाग के सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों को पूरी तरह से ‘बाधा रहित’ (Ramp Friendly) बनाना। जब तक इन आधुनिक वाहनों के लिए हमारी सड़कें और इमारतें सुलभ नहीं होंगी, तब तक सशक्तीकरण का यह पहिया अपनी पूरी रफ्तार से नहीं घूम पाएगा। बहरहाल, डीसी हेमंत सती और उनकी पूरी टीम की यह मुस्तैदी हजारीबाग वासियों के लिए एक बेहद सुखद और प्रेरणादायी संदेश है।