उदयपुर/ सरगुजा
उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम बासेन में दिनांक 24 मई 2026 को आदिवासी महापंचायत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष उपस्थित रहे। महापंचायत में मुख्य रूप से प्रस्तावित केते एक्सटेंशन कोल माइंस परियोजना का विरोध किया गया।
महापंचायत में ग्राम पंचायत बासेन के सरपंच श्रीमती रामेश्वरी पोर्ते सिंह पोर्ते सरपंच प्रतिनिधि बासेन ग्राम पंचायत परसा की सरपंच तुलसी मनोहर सिंह, ग्राम पंचायत घाटबर्रा के सरपंच प्रतिनिधि अमरेश प्रसाद मरकाम, ग्राम पंचायत साल्ही कलेश्वरी विजय कोर्राम, ग्राम साल्ही क्षेत्र के पूर्व जनपद सदस्य बालसाय कोर्राम ग्राम पंचायत सानीबर्रा के सरपंच मनबोध सिंह मरकाम, ग्राम पंचायत सोनतराई के सरपंच नवल सिंह वरकड़े पूर्व जिला अध्यक्ष गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जिला सरगुजा ग्राम पंचायत पेंडरखी के सरपंच कलम साय मझवार, ग्राम पंचायत नारायणपुर सरपंच उमेश्वर सिंह पैकरा ग्राम पंचायत डांडगांव के सरपंच देवलोचन सिंह उईके ग्राम पंचायत सलबा के सरपंच दिनेश पावले सामाजिक कार्यकर्ता रामजीत आर्मो सहित गांव के प्रमुख नागरिक शिवनारायण पोर्ते अदल साय, शिवप्रसाद, हीरा साय, ठाकुर राम कुसरो, संमल सिंह आरमो सनी राम पंडो, जय सिंह पंडो, गुलाम राम, जगत राम, विनोद सिंह, मुनेश्वर सिंह पोर्ते पंतागो बाई मानकुंवर हेमलता देवमती ठाकुर राम ओरकेरा जगत राम मझवार सहित लगभग 200से 250ग्रामीण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह लगभग 11:30 बजे बासेन स्थित बुढादेव स्थल में पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद दोपहर लगभग 2:30 बजे सभा का आयोजन किया गया। मंच संचालन विजय सिंह कोराम द्वारा किया गया। उन्होंने आसपास के ग्राम पंचायतों से आए सरपंचों एवं जनप्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया।
महापंचायत में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि अदानी कंपनी द्वारा केते एक्सटेंशन कोल माइंस परियोजना शुरू करने की तैयारी की जा रही है, जिसका क्षेत्रीय ग्रामीण एवं आदिवासी समाज विरोध कर रहा है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी एवं ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि “केते एक्सटेंशन कोल माइंस को किसी भी स्थिति में शुरू नहीं होने दिया जाएगा।” उनका कहना था कि यदि परियोजना प्रारंभ हुई तो लाखों पेड़ों की कटाई होगी तथा क्षेत्र के जल, जंगल और जमीन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
सभा को संबोधित करते हुए विजय सिंह कोर्राम ने कहा कि आदिवासी महापंचायत की ओर से 23-24 बिंदुओं का ज्ञापन तैयार किया गया है, जिसे उदयपुर अनुविभागीय अधिकारी के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम सौंपा जाएगा। ज्ञापन में अनुसूचित क्षेत्र के आदिवासियों को वन अधिकार पत्र नहीं मिलने, उचित मुआवजा नहीं दिए जाने, स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिलने सहित कई अन्य समस्याओं का उल्लेख किया गया है। साथ ही केते एक्सटेंशन कोल माइंस परियोजना को तत्काल रोकने की मांग की गई है।
महापंचायत में वक्ताओं ने दावा किया कि परियोजना शुरू होने पर आधिकारिक रूप से लगभग सात लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान है, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक, लगभग 50 लाख पेड़-पौधों तक हो सकती है। ग्रामीणों ने पर्यावरण एवं आदिवासी अस्तित्व की रक्षा के लिए आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी।