इंडियन टीवी न्यूज़
सुशील चौहान
शिवहरे के घटिया विकास को अधिकारियों का संरक्षण,आखिर असली गुनहगार कौन?
सिवनी:सरकारी धन का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार किस कदर हावी है इसका जीता-जागता उदाहरण बरघाट क्षेत्र में देखने को मिल रहा है।विकास कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने में खुलेआम सेंधमारी की गई है।रसूखदार ठेकेदार शिवकुमार शिवहरे और उसके भ्रष्ट तंत्र ने मिलकर न केवल सरकार की साख को बट्टा लगाया है बल्कि क्षेत्र के विकास को भी गहरी खाई में धकेल दिया है।लाखो रुपये की लागत से बने चेक डेम,स्नान घाट,और पुल-पुलिया पहली ही बारिश में इस भ्रष्टाचार की कहानी खुद बयां कर रहे हैं।निर्माण कार्यों में जमकर की गई घटिया सामग्री के इस्तेमाल और अधिकारियों की साठगांठ से करोड़ों का हेरफेर किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
♦️कागजों पर विकास, जमीन पर विनाश:करोड़ों का हेरफेर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ठेकेदार शिवकुमार शिवहरे को क्षेत्र में जल संरक्षण और आवागमन को सुगम बनाने के लिए विभिन्न विकास कार्यों के टेंडर दिए गए थे।लेकिन शिवहरे के’भ्रष्ट सिंडिकेट’ ने तकनीकी मापदंडों को ताक पर रखकर केवल अपनी जेबें भरने का काम किया।
♦️खोखले साबित हुए चेक डेम:पानी रोकने के लिए बनाए गए चेक डेम पहली ही बाढ़ का दबाव नहीं झेल पाए।सीमेंट की जगह रेत की मात्रा अधिक होने के कारण कई डेमों में दरारें आ चुकी हैं,जिससे किसानों का पानी तो नहीं रुका लेकिन जनता का पैसा पानी में जरूर बह गया।
♦️धंस गए स्नान घाट:आस्था और पर्यटन के नाम पर करोड़ों की लागत से बनाए गए स्नान घाटों की सीढ़ियां धंसने लगी हैं।घाटों पर बिछाई गई टाइल्स और पत्थर उखड़ चुके हैं, जो कभी भी किसी बड़े हादसे को आमंत्रण दे सकते हैं।
♦️मौत का कुआं बनीं पुल-पुलिया:ग्रामीणों को जोड़ने के लिए बनाई गईं पुल-पुलिया निर्माण के कुछ महीनों के भीतर ही जर्जर हो चुकी हैं।पुलों के पिलर और बेस में घटिया लोहे और मटीरियल का इस्तेमाल किया गया है जिससे क्षेत्र के हजारों लोगों की जान जोखिम में पड़ गई है।
♦️अधिकारियों की’मौन स्वीकृति’ पर उठे सवाल
इस पूरे घोटाले में सबसे बड़ा सवाल संबंधित विभाग के इंजीनियरों और प्रशासनिक अधिकारियों पर उठ रहा है।बिना किसी गुणवत्ता जांच (Quality Check) के ठेकेदार को करोड़ों रुपये का भुगतान कैसे कर दिया गया?जनता के बीच चर्चा है कि शिवकुमार शिवहरे के इस भ्रष्ट तंत्र को ऊंचे रसूख और विभागीय अफसरों की मौन स्वीकृति हासिल है जिसके दम पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है।