बरेली 07,जुलाई 2026 को साइबर क्राइम पुलिस ने प्रॉपर्टी बिजनेस के नाम पर सेना का फर्जी अधिकारी बनकर लाखों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने साइबर ठगी के इस मामले में किराए पर बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले एक शातिर अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित के ₹3.54 लाख वापस भी करा दिए हैं।मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि 24 दिसंबर 2025 को पीड़ित रामप्रताप (निवासी: ताज कॉलोनी, बुखारा रोड, फरीदपुर, बरेली) ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि एक अज्ञात महिला ने खुद को सेना का अधिकारी बताकर प्रॉपर्टी बिजनेस के नाम पर फोन और चैट के जरिए उनका विश्वास जीता। इसके बाद महिला ने विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹9,08,000 जमा करवाकर उनके साथ साइबर ठगी कर ली। शिकायत के आधार पर पुलिस ने थाना साइबर क्राइम बरेली में मुकदमा संख्या 53/2025 के तहत बीएनएस और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।विवेचना के दौरान पुलिस ने मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन का तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) किया। इस जांच में दो मुख्य अभियुक्तों के नाम सामने आए। इनमें से एक अभियुक्त मनीष दास पूर्व में ही माननीय न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण कर चुका है। वहीं, शेष वांछित अभियुक्त चन्दन कुमार दास को 07 जुलाई 2026 को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसे अब कानूनी कार्रवाई करते हुए न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।गिरफ्तार अभियुक्त का विवरण,नाम: चन्दन कुमार दास (पुत्र रमाकान्त दास)मूलनिवासी बलीगांव, थाना बहेरी, बालगांव, जिला दरभंगा, बिहार।वर्तमान पता: सेक्टर 23 ए, आकाश पीजी के पास, थाना पालम विहार, गुरुग्राम, हरियाणा।पुलिस पूछताछ में अभियुक्त चन्दन कुमार दास ने बताया कि वह केवल कक्षा 8 तक शिक्षित है और उसका परिवार पिछले 7-8 वर्षों से विभिन्न राज्यों में मजदूरी कर जीवन-यापन कर रहा है। अक्टूबर 2025 में गुरुग्राम में डिलीवरी बॉय का काम करने के दौरान उसकी मुलाकात ‘राज’ नाम के एक व्यक्ति से हुई, जिसने खुद को कंपनी का मैनेजर बताया था।राज ने चन्दन को लालच दिया कि यदि वह लोगों के बैंक खाते खुलवाकर उसे देगा (जिसमें मोबाइल नंबर राज का रहेगा), तो उसे हर खाते के बदले ₹5,000 और बाद में नियमित मासिक पैसे मिलेंगे। चन्दन ने लालच में आकर बिहार और अन्य जगहों के मजदूरों के लगभग 14 बैंक खाते खुलवाकर राज को सौंप दिए। बाद में खाते फ्रीज होने और पुलिस जांच शुरू होने पर उसे समझ आया कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जा रहा था।बरेली साइबर क्राइम पुलिस ने I4C (इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर) और संबंधित बैंकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर ठगी गई कुल राशि में से ₹3,54,000 पीड़ित के बैंक खाते में वापस (रिफंड) करा दिए हैं। शेष धनराशि को भी वापस कराने के लिए पुलिस द्वारा प्रयास जारी हैं।इस शानदार कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में निम्नलिखित अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे,प्रभारी निरीक्षक धनंजय कुमार पाण्डेय (थाना साइबर क्राइम, बरेली)उपनिरीक्षक गुरमीत तोमर,हेड कांस्टेबल हरेन्द्र,हेड कांस्टेबल हर्षित वर्मा,हेड कांस्टेबल धीरज कुमार।
रिपोर्ट:शुऐब खान ब्योरो चीफ बरेली डिवीज़न