किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
नारायणपुर। अबूझमाड़ के सुदूर गांव कोहकापार में दशकों बाद शिक्षा की नई रोशनी पहुंची है। नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने दुर्गम जंगलों, पहाड़ों और उफनते नदी-नालों को पार कर गांव में प्राथमिक विद्यालय का शुभारंभ किया। उन्होंने बच्चों के साथ घोटूल में बैठकर ककहरा पढ़ाया और उन्हें शिक्षा के महत्व से परिचित कराया।
बारिश से भीगी पगडंडियों और कठिन रास्तों से गुजरते हुए कलेक्टर नम्रता जैन सुरक्षा बल के जवान के साथ बाइक से करीब 100 किलोमीटर की यात्रा कर कोहकापार पहुंचीं। यह केवल एक प्रशासनिक दौरा नहीं था, बल्कि उस गांव तक शिक्षा की पहली दस्तक थी, जहां अब तक किसी बच्चे ने स्कूल की घंटी नहीं सुनी थी।
विद्यालय के उद्घाटन के साथ पहली बार गांव में पाठशाला की घंटी बजी, बच्चों के हाथों में किताबें पहुंचीं और शिक्षा का नया अध्याय शुरू हुआ। वर्षों तक नक्सली हिंसा और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा से वंचित रहे इस क्षेत्र के लिए यह ऐतिहासिक पल माना जा रहा है।
प्रशासन के ‘स्कूल केइंता’ मिशन के तहत बस्तर संभाग में अब तक 421 से अधिक बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू किया जा चुका है। इस पहल का उद्देश्य दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों तक शिक्षा पहुंचाना तथा उन्हें बेहतर भविष्य के अवसर उपलब्ध कराना है।
कोहकापार में स्कूल खुलने के साथ अबूझमाड़ के बच्चों के लिए शिक्षा का नया रास्ता खुल गया है। यह पहल इस बात का प्रतीक है कि बस्तर अब धीरे-धीरे बंदूकों के साये से निकलकर शिक्षा, विकास और नई उम्मीदों की ओर बढ़ रहा है।