वाराणसी। काशी में गंगा और वरुणा के बढ़ते जलस्तर के बीच गुरुवार की सुबह महापौर अशोक कुमार तिवारी उस समय चौंक गए, जब उनके मोबाइल की घंटी बजी। फोन प्रधानमंत्री एवं वाराणसी के सांसद नरेंद्र मोदी का था। उस वक्त महापौर कंदवां-अवलेशपुर क्षेत्र में पार्षदों के साथ बाढ़ और जलजमाव वाले इलाकों का निरीक्षण कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने करीब साढ़े तीन मिनट की बातचीत में काशी में बाढ़ के हालात और राहत कार्यों की जानकारी ली।
महापौर के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने बातचीत की शुरुआत करते हुए काशी में गंगा और वरुणा की स्थिति के बारे में पूछा। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि पानी किन-किन इलाकों तक पहुंचा है। पीएम ने विशेष रूप से दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, ढेलवरिया और नक्की घाट की स्थिति के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही वरुणा नदी में पानी के स्तर और तटवर्ती इलाकों की स्थिति भी पूछी।
महापौर ने प्रधानमंत्री को बताया कि सुसुवाही, कंचनपुर, कंदवा और सीरगोवर्धन सहित कुछ क्षेत्रों में जलभराव है। वहीं वरुणा के तटवर्ती आदमपुर, फुलवरिया, नक्कीघाट, सरैया और अलईपुरा समेत कई इलाकों में पानी आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच गया है।
बोले पीएम, जनता के बीच रहें जनप्रतिनिधि
महापौर ने प्रधानमंत्री को बताया कि नगर निगम और प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने में जुटी हैं। इस पर प्रधानमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों और पार्षदों को प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर लगातार जनता के बीच रहने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए और शिकायतों का तत्काल समाधान किया जाए।
महापौर ने कहा कि प्रधानमंत्री का काशी के अलग-अलग क्षेत्रों और घाटों की स्थिति के बारे में बारीकी से जानकारी लेना उनके लिए खास अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि एक सांसद और जनप्रतिनिधि के रूप में अपने संसदीय क्षेत्र के प्रति प्रधानमंत्री की चिंता इस बातचीत में स्पष्ट दिखाई दी।
महापौर के बाद डीएम से भी बात
महापौर से बातचीत के तुरंत बाद प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार को फोन कर प्रधानमंत्री से बातचीत की सूचना दी गई। इसके करीब 30 सेकेंड बाद प्रधानमंत्री ने डीएम से सीधे फोन पर बात की। उन्होंने गंगा और वरुणा के जलस्तर प्रभावित क्षेत्रों और राहत बचाव कार्यों की विस्तार से जानकारी ली।
डीएम ने प्रधानमंत्री को बताया कि गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से करीब 30 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। गंगा के जलस्तर बढ़ने से वरुणा में पलट प्रवाह की स्थिति बनी है, जिसके कारण वरुणा के तटवर्ती करीब 15 मोहल्ले प्रभावित हुए हैं।
17 राहत शिविरों में 1850 लोग
जिलाधिकारी ने बताया कि प्रभावित लोगों के लिए 17 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें करीब 1850 लोग रह रहे हैं। प्रशासन की ओर से कुल 61 राहत शिविर चिन्हित किए गए हैं। जरूरत बढ़ने पर इनकी संख्या भी बढ़ाई जा सकती है।
प्रधानमंत्री ने राहत शिविरों में उपलब्ध सुविधाओं और आगे की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली। डीएम ने बताया कि अभी बारिश जारी है, ऐसे में गंगा का जलस्तर और बढ़ सकता है। बारिश थमने के बाद धीरे-धीरे बाढ़ की स्थिति में कमी आने की उम्मीद है। प्रशासनिक टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी और राहत-बचाव कार्य में जुटी हैं।