बारीपदा, 16/09/2026: ओडिशा के प्रसिद्ध शिमिलिपाल टाइगर रिजर्व (STR) में बाघों और शाकाहारी वन्यजीवों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। वन्यजीवों के आवास को बेहतर बनाने तथा उनके लिए प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार की ओर से 500 हेक्टेयर से अधिक क्षतिग्रस्त घासभूमि के पुनरुद्धार का अभियान शुरू किया गया है।वन विभाग की ओर से पहले चरण में 70 हेक्टेयर अवक्रमित घासभूमि में क्रमिक रूप से पुनरुद्धार कार्य किया जा रहा है। इसमें दक्षिण वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत 50 हेक्टेयर तथा अन्य वन प्रभाग में 20 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है।इस अभियान की खास बात यह है कि बाजार से सामान्य या व्यावसायिक घास के बीज खरीदने के बजाय शिमिलिपाल के जंगल में प्राकृतिक रूप से उगने वाली स्थानीय घासों के बीज एकत्र कर उनका उपयोग किया जा रहा है। इससे जंगल के मूल पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।भविष्य में बड़े स्तर पर बीज उपलब्ध कराने के लिए वनकर्मी स्थानीय घासों के बीज की नर्सरी भी तैयार कर रहे हैं। प्रयोग के तौर पर चार अलग-अलग पद्धतियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनमें ‘संपूर्ण बीज बुवाई’ पद्धति को विशेष सफलता मिली है। वर्ष 2025-26 में 40 हेक्टेयर भूमि पर इस पद्धति से घास उगाई गई थी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।शिमिलिपाल टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक तथा क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि घासभूमि जंगल की खाद्य श्रृंखला का आधार है। स्वस्थ घासभूमि से सांभर और गौर जैसे शाकाहारी वन्यजीवों के लिए भोजन की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे आगे चलकर बाघ जैसे मांसाहारी वन्यजीवों के लिए पर्याप्त शिकार उपलब्ध होने तथा उनके संरक्षण और प्रजनन में सहायता मिलेगी।लगभग 2,750 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले शिमिलिपाल में करीब 1,250 हेक्टेयर घासभूमि है। हालांकि, कई क्षेत्रों में अवांछित घास तथा अनावश्यक झाड़ियों के बढ़ने के कारण 40 प्रतिशत से अधिक घासभूमि प्रभावित हो चुकी है।वन विभाग के इस नए अभियान से शिमिलिपाल की पारंपरिक खुली घासभूमि को फिर से विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही, इससे बाघ संरक्षण अभियान को भी और मजबूती मिलने की संभावना है।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज।