तेजा दशमी और रामदेव जयंती: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को राजस्थान के लोक देवता वीर तेजाजी और बाबा रामदेव जी की जयंती व तेजा दशमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन राजस्थान के विभिन्न तेजाजी मंदिरों (जैसे खरनाल, सुरसुरा, परबतसर) और रामदेवरा में भव्य मेलों का आयोजन होता है और श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना व पैदल यात्रा करते हैं।
तांती (रक्षा सूत्र) खोलना या बांधना: ग्रामीण क्षेत्रों में किसान और पशुपालक जहरीले जीवों (जैसे सांप) से रक्षा के लिए तेजाजी के नाम का धागा (तांती) बांधते हैं। अगर पहले से कोई तांती बंधी है, तो आज के दिन उसे खोलकर तेजाजी के थान पर चढ़ाया जाता है और नई तांती बांधी जाती है।पशुओं की सेवा: तेजाजी महाराज को गायों और पशुओं का रक्षक माना जाता है। इस दिन गायों को हरा चारा खिलाना और घायल या बीमार पशुओं की सेवा करना बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है।
बाबा रामदेव जी की पूजा और ‘अलख’ जगाना: बाबा रामदेव जी को कृष्ण का अवतार माना जाता है। इस दिन उनके प्रतीक चिन्ह “पगलिये” (चरण चिह्न) या उनकी तस्वीर का पंचामृत और जल से अभिषेक करें। उन्हें कुमकुम, अक्षत (चावल) और फूल चढ़ाएं।
जयपुर सिटी निवारू में आज तेजा दशमी पर्व पर सुबह से रात्रि तक भजन कीर्तन चलेंगे जिसमें दर्शनार्थी आ रहे हैं और रात्रि तक आएगे। जिसके चलते यहां मेले का आयोजन भी हुआ है।
जयपुर सिटी
झोटवाड़ा क्षेत्र / निवारू
ब्यूरो चीफ
स्वपनदीप जोशी
